कार्रवाई से भड़के वनकर्मी, आंदोलन की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राजाजी टाइगर रिजर्व में गुलदार की खाल बरादमगी प्रकरण में हरिद्वार रेंजर समेत तीन कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई के बाद से वनकर्मियों में आक्रोश है। इस प्रकरण में आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए शनिवार को हरिद्वार में रेेंजर, वन दारोगाओं, वन बीट अधिकारियों व वनकर्मियाें की बैठक बुलायी गई है।
बता दें, राजाजी टाइगर रिजर्व में 22 मार्च को तेंदुए की खाल के साथ ही मांस और हड्डियां भी बरामद की गई थीं। जिसे राजाजी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वैभव कुमार की मौजूदगी में मोतीचूर बंगले में सील कर दिया गया था और फिर विस्तृत जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान भेजा गया था। बाद में प्रकरण की जांच कर रहे तत्कालीन जांच अधिकारी वार्डेन कोमल सिंह को हटा दिया गया था। इसके बाद जांच मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन को सौंपी गई थी। सीसीएफ मनोज चंद्रन ने अपनी रिपोर्ट प्रमुख वन संरक्षक को जयराज को सौंपी थी। मुख्य वन संरक्षक ने अपनी रिपोर्ट में राजाजी टाइगर रिजर्व के हरिद्वार रेंजर अनूप गुसांई, वन दारोगा अशोक सिंह, आरक्षी प्रवेश कुमार के निलंबित करने की संस्तुति की थी। इसके बाद प्रमुख वन सरंक्षक व विभागाध्यक्ष जयराज ने रेंजर समेत तीनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए कार्यालय संबद्ध कर दिया था। वहीं इस कार्रवाई के बाद से कर्मचारियों में आक्रोश है। वन बीट अधिकारी संघ के अध्यक्ष हरपाल सिंह गुसांई का कहना है कि वन्यजीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी राजाजी टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों पर ही है। ऐसे मेें हमारी भूमिका पर सवाल उठाना न्यायसंगत नहीं हैं। प्रकरण गंभीर है ऐसे में उच्च स्तरीय जांच कराने की जरूरत है। इसके लिए शनिवार को हरिद्वार में होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी और आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।