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50 करोड़ की देनदारी, कैसे हो पर्यटन सीजन की तैयारी

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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रोडवेज पर 50 करोड़ रुपये की देनदारी है। बसों के लिए डीजल, टायर से लेकर बसों के मेंटेनेंस पार्ट तक उधार में लिए जा रहे हैं। ऐसे में रोडवेज अगले महीने से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन में कैसे उतरेगी? इसे लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
पर्यटन सीजन में यात्रियों की संख्या में काफी इजाफा होता है। इसके मद्देनजर रोडवेज की कोशिश होती है की 1100 बसों के बेड़े में से एक हजार से ज्यादा बसें संचालित की जा सकें। इसके अलावा व्यस्त रूटों पर बसों के ट्रिप बढ़ाए जाएं। बसें मेंटेनेंस के चलते खड़ी न हों, उसके लिए कार्यशालाओं में इंजन ऑयल, बसों के पार्ट, टायर आदि एडवांस में पहुंचा दिए जाते हैं, लेकिन रोडवेज के मौजूदा हालत बदतर है। रोडवेज डीजल, इंजन ऑयल, टायर, बसों के पार्ट उधार में खरीद रहा है। इसके अलावा निजी क्षेत्र के सहयोग से दो सौ अनुबंधित बसों का संचालन होता है। इनके बस संचालकों का भी करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित है। अनुबंधित बस संचालक तो भुगतान न होने की दशा में दबी जुबान में बस चलाने में असमर्थता भी जता चुके हैं, जिनको मानने की कोशिश में रोडवेज प्रबंधन जुटा है। इधर, प्रबंधन दावा कर रहा है कि पर्यटन सीजन में सेवाओं पर असर नहीं आने दिया जाएगा।
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ग्रेच्युटी भी देना बाकी
इन देनदारियों के अलावा सेवानिवृत्त कर्मियों की ग्रेच्युटी का मामला भी लंबे समय अटका हुआ है। रोडवेज प्रबंधन को सेवानिवृत्त कर्मियों को करीब 20 करोड़ की ग्रेच्युटी का भुगतान करना है। इसके अलावा रोडवेज के नियमित कर्मियों को फरवरी माह का वेतन तक नहीं मिला है।
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कोट
रोडवेज के सामने कुछ आर्थिक समस्याएं हैं, उनका हल निकालने की कोशिश हो रही है। जो देनदारियां हैं, उनका क्रमवार भुगतान किया जा रहा है। अनुबंधित बस संचालकों से भी बातचीत की गई है। पूरी कोशिश होगी रोडवेज पूरी क्षमता के साथ पर्यटन सीजन में यात्रियों को बेहतर सेवा प्रदान करे।
- दीपक जैन, रोडवेज महाप्रबंधक संचालन व तकनीकी
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