ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) मसूरी में वर्ष 2015 में हुए गोलीकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ने आईटीबीपी के जवान चंद्रशेखर को दोषी ठहराया है। गोलीकांड में एक दारोगा की मौत हो गई थी, जबकि बचाव में एक अन्य जवान गंभीर घायल हुआ था। चंद्रशेखर को 27 मार्च को सजा सुनाई जाएगी।
शासकीय अधिवक्ता जेके जोशी ने बताया कि 10 जुलाई 2015 को एलबीएसएनएए गेट के बैरक में आईटीबीपी 34वीं बटालियन के दारोगा सुरेंद्र लाल और सिपाही अख्तर हुसैन कुछ अन्य जवानों के साथ आराम कर रहे थे। तभी जवान चंद्रशेखर वहां पहुंचा और एलएमजी से सुरेंद्र लाल पर गोली चला दी। बीच बचाव की कोशिश में अख्तर हुसैन को भी गोली लगी। गोली लगने से सुरेंद्र लाल की मौत हो गई। भागते समय चंद्रशेखर ने गेट पर तैनात दरोगा राकेश पर भी गोली चलाई। हालांकि, किस्मत अच्छी होने के चलते वह बच गए। चंद्रशेखर कई जिंदा कारतूस और एलएमजी लेकर फरार हो गया था।
मसूरी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की। दो दिन बाद चंडीगढ़ में सेक्टर-36 थाने की पुलिस ने उसे पकड़ लिया था। उसके कब्जे से एलएमजी और 70 जिंदा कारतूस भी बरामद हुए थे। मामले में कुल 23 गवाहों का परीक्षण हुआ। शनिवार को एडीजे तृतीय अजय चौधरी ने चंद्रशेखर को धारा 302 और 307 के तहत दोषी ठहराया। उसे सुरेंद्र लाल की हत्या और अख्तर हुसैन की हत्या के प्रयास का दोषी करार दिया गया है। इस मामले में सजा का एलान 27 मार्च को होगा। जोशी के अनुसार, धारा 302 में उसे मृत्युदंड भी दिया जा सकता है। दोषी करार देने के बाद चंद्रशेखर को जेल भेज दिया गया।