अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। प्रेमनगर आश्रम के बंद कमरे में जब गुफ्तगु चल रही थी तब बाहर का माहौल बेहद भी बेचैनी भरा था। भाजपाई भी जुटे हुए थे। आश्रम के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी बेसब्री से यहां दरवाजा खुलने का इंतजार कर रहे थे। जैसे जैसे सांसद, विधायक निकलते गए उनकी जिज्ञासा बढ़ती चली गई।आखिर में अंदर रह गए प्रदेश अध्यक्ष और सतपाल महाराज के बीच वार्ता का दौर चलता रहा तो हर किसी की निगाह दरवाजे पर ही रही। तीन बार सतपाल महाराज ने कमरे के बाहर झांककर चाय, खाने की सामग्री मंगाई तब हर कोई दरवाजे की तरफ ये सोचकर दौड़ा कि अब बैठक खत्म हो गई है।