श्रीनगर। जल विद्युत परियोजना का संचालन कर रही एएचपीसीएल की ओर से अनुशासनात्मक आदेश जारी करने से कर्मचारी भड़क गए हैं। कर्मचारियों ने इसे उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बताया है। कर्मियों ने आठ सूत्री मांगों के निराकरण को सीएम का ज्ञापन भेजा।
एएचपीसीएल (अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लि.) के कर्मचारियों ने ज्ञापन में कहा कि कंपनी ने आंदोलनात्मक गतिविधि पर रोक लगा दी है। इसका साफ मतलब है कि कोई हक-हकूक के लिए आवाज नहीं उठाएगा। पूर्व में कंपनी के साथ अनुबंध हुआ था कि भूमिधर कर्मचारियों को केंद्रीय गढ़वाल विवि के कर्मचारियों के समान वेतन-भत्ते मिलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कर्मचारियों ने कहा कि कंपनी की ओर से 22 दिसंबर 2017 को जारी पत्र अमान्य है। क्योंकि इसमें कर्मचारियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। पूर्व में जारी नियुक्ति पत्र में प्रत्येक कर्मचारी के विभाग व पद का उल्लेख किया गया है, लेकिन कंपनी इसके विपरीत कर्मचारियों को इससे निचले पद की जिम्मेदारी दी जा रही है।
ज्ञापन में मुकेश राणा, प्रवीण रतूड़ी, केदार बिष्ट, बदरी पांडे, दिनेश लाल स्नेही, भगत लाल, देवेंद्र रावत, शशि रावत, कैलाश पांडे, संजय पांडे, युद्धवीर, शंकर राणा और गणेश रतूड़ी आदि के हस्ताक्षर हैं।