फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उच्च न्यायालय की अवमानना न करें अखाड़े

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
हरद्विार।
उत्तर भारत में पहले शंकरचार्य मठों के व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद महाराज ने कहा कि अखाड़ों को वासुदेवानंद को बुलाकर उच्च न्यायालय की अवमानना नहीं करनी चाहिए। वासुदेवानंद को देश की किसी भी अदालत ने शंकराचार्य नहीं माना। ऐसे में यदि प्रयाग मेले में वासुदेवानंद का सम्मान अखाड़ों की ओर से शंकराचार्य के रूप में किया जाता है तो यह उच्च न्यायालयों की अवमानना होगी। ज्योर्तिपीठ पर हाल ही में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती अभिषेक के बाद पुन: आसीन हो चुके हैं।
हरिद्वार शंकराचार्य मठ में प्रेस वार्ता में स्वामी श्रीधरानंद महाराज ने कहा कि माघ मेले में अखाड़ों का कोई स्नान नहीं होता। साधु संत अलग- अलग जाकर स्नान करते हैं। अब यदि ऐसे में वासुदेवानंद को बुलाया जा रहा है तो वे एक साधु के नाते जा सकते हैं, शंकराचार्य के नाते नहीं। वे कभी भी शंकराचार्य नहीं माने गए। ज्योर्तिपीठ पर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती शंकराचार्य के रूप में लंबे अर्से से आसीन थे। हाल ही में जबलपुर में उनका फिर अभिषेक पूर्ण विधि विधान के साथ किया जा चुका है। अब स्वरूपानंद सरस्वती ज्योर्तिपीठ और शारदापीठ दोनों के ही शंकराचार्य है। देश का समूचा हिंदू समाज तथा साधु संत स्वरूपानंद को ही शंकराचार्य मानता है। वासुदेवानंद का इस परंपरा से कोई रिश्ता नहीं है। उन्हें किसी भी सूरत में शंकराचार्य पद नाम नहीं दिया जा सकता। इलाहाबाद में हुई अखाड़ा परिषद की बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ कि वासुदेवानंद का सम्मान माघ मेले में किया जाएगा। अखाड़ा परिषद ने बैठक के बाद भी ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

गौरतलब है कि वासुदेवानंद को जूना अखाड़ा पुराने समय से ज्योर्तिपीठाधीश्वर मानता आया है। उच्च न्यायालय ने वासुदेवानंद को शंकराचार्य नहीं माना। अब जूना अखाड़ा यह जानते हुए भी कि न्यायालय का निर्णय अंतिम है, वासुदेवानंद को प्रयाग के माघ मेले में बुला रहा है। कहा कि उन्हें किसी भी अखाड़े ने शंकराचार्य के रूप में प्रतिष्ठा दी तो भारी विवाद हो जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें