गोपेश्वर। इंजीनियरिंग कॉलेज गोपेश्वर में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ाने के लिए कालेज के प्रवक्ता शीतकालीन अवकाश में युवाओं को तकनीकी शिक्षा के प्रति जागरूक करेंगे। प्रवक्ता गांव-गांव जाकर युवाओं को तकनीकी शिक्षा और संस्थान में संचालित ट्रेडों के बारे में भी बताएंगे।
वर्ष 2015 में गोपेश्वर इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना हुई। यहां मौजूदा समय में सात सौ छात्र-छात्राएं हैं। वर्तमान में यहां मेकेनिकल, कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिकल इंजीनियरिंग के ट्रेड चल रहे हैं। इन ट्रेडों की पढ़ाई के लिए शिक्षकों की पर्याप्त सुविधा है और प्रत्येक ट्रेड की अपनी लैब है, लेकिन जागरूकता के अभाव में छात्र-छात्राएं मैदानी क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा लेने पहुंच रहे हैं। अब इंजीनियरिंग कॉलेज ने यहां प्रवेश संख्या बढ़ाने के लिए एक योजना बनाई है। इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक केकेएस मेर का कहना है कि अभिभावकों और छात्र-छात्राओं को जागरूक करने और भविष्य में तकनीकी शिक्षा की मांग को देखते हुए शिक्षकों को गांव-गांव भेजा जाएगा। कॉलेज में 15 जनवरी तक सेेमेस्टर परीक्षाएं हो जाएंगी और इसके बाद करीब एक माह तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। अवकाश के दौरान संस्थान के 46 प्रवक्ता गांव-गांव में जाकर युवाओं को तकनीकी शिक्षा के बारे में जानकारी देंगे और संस्थान में संचालित ट्रेडों के बारे में बताएंगे।
तकनीकी शिक्षा के लिए मिलती है छात्रवृत्ति
इंजीनियरिंग कॉलेज गोपेश्वर में अध्ययनरत एससी, एसटी और ओबीसी के छात्र-छात्राओं को जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से छात्रवृत्ति मुहैया कराई जाती है। प्रतिवर्ष एक छात्र को करीब पचास हजार रुपये छात्रवृत्ति के रूप में दिए जाते हैं। ऐसे में छात्र छात्रवृत्ति से ही तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर अपना भविष्य संवार सकते हैं।
संस्थान को मिलेंगे अतिरिक्त शिक्षक
गोपेश्वर। तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के तहत इंजीनियरिंग कॉलेज गोपेश्वर को आगामी जनवरी माह में बीस अतिरिक्त शिक्षक मिल जाएंगे। कॉलेज के निदेशक केकेएस मेर ने बताया कि देशभर के आईआईटी, एनआईसी से शिक्षा ग्रहण कर चुके अव्वल छात्र-छात्राओं को देश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षक के रूप में भेजा जा रहा है। इन शिक्षकों को विश्व बैंक की मदद से प्रतिमाह 70 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। केंद्र सरकार का उद्देश्य अधिकाधिक छात्र-छात्राओं को तकनीकी शिक्षा मुहैया कराना है।