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लालढांग में बंद कराया बाजार, शांतिमार्च निकाला

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लालढांग। दो दिन पहले जंगल में गाय के अवशेष मिलने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बुधवार को लालढांग कस्बा बंद रहा और ग्रामीणों ने शांति मार्च निकाला। ग्रामीणों ने गाय को मारने वालों की गिरफ्तारी नहीं होने पर नाराजगी जताई। इस दौरान बाजार में भारी पुलिस फोर्स तैनात रहा।
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दो दिन पहले जंगल में गाय का सिर मिला था। ग्रामीणों का कहना है कि गाय को मारने के बाद उसका अवशेष जंगल में फेंका गया। ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। गिरफ्तारी नहीं होने पर बुधवार ग्रामीण लालढांग कस्बे में एकत्र हुए और दुकानों को बंद करा दिया। इसके बाद गांधी चौक से कटेबड़ तक शांति मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने पुलिस पर संवेदनशील प्रकरण में ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाया। एसओ प्रदीप मिश्रा ने पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने आश्वस्त किया कि आरोपियों को चिन्हित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस मौके पर संतराम सिंह, आलोक द्विवेदी, पंकज चमोली, शैलेश कुमार, बुंदू हसन, मोहम्मद वाजिद, मोहम्मद नौशाद, एहसान अहमद, जुनेद, दिनेश कर्णवाल, रोहित नेगी, शुभम नेगी, जयप्रकाश बहुगुणा सूर्य प्रताप सिंह रावत, कैलाश सिंह, मुकेश नेगी, जितेंद्र चौहान, श्रेष्ठ कुमार चौहान, मुकेश डबराल, दिनेश बड़ौला, सुरेंद्र सिंह रावत, कीर्ति मोहन दिवेदी, गौरव वर्मा, जसविंदर सिंह, चंद्र गोपाल कुकरेती, सुभान अली, संजीत टांक आदि मौजूद थे।
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जांच के लिए भेजा अवशेष
स्थानीय पुलिस ने कब्जे में लिए गए अवशेष को विधि विज्ञान प्रयोगशाला देहरादून में भेजा है। एफएसएल की जांच में साफ होगा कि अवशेष गाय का ही है या किसी दूसरे पशु का। एसओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि रिपोर्ट आने में कुछ वक्त लग सकता है।
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शांति मार्च में पहुंचे मुस्लिम
शांति मार्च में हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखने वाले क्षेत्रवासी भी शामिल हुए। क्षेत्रवासियों ने इसे मजहबी एकता बताया। शांति मार्च में लालढांग कस्बे के अल्पसंख्यकों ने भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म की भावना से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। इन लोगों ने मांग कि की जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए।
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