आदिबदरी। तहसील के मज्याड़ी मल्ली गांव में आयोजित भरसर-घन्याल देवता की जात के अंतिम दिन 31 साल बाद ईष्ट देवता भरसर और घन्याल देवता का मिलन हुआ। इस देव मिलन और दर्शनों के साक्षी यहां सैकड़ों ग्रामीण बने। श्रद्धालुओं ने भरसर और घन्याल देवताओं की पूजा की और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
मज्याड़ी मल्ली गांव में तीन दिनों से चल रहे आयोजन के अंतिम दिन मंगलवार को ब्रह्मबेला पर पंडित उद्धव प्रसाद मलगुड़ी, भरत मलगुड़ी और आयोजकों ने वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ भूमियाल देवता के साथ भरसर और घन्याल देवता की पूजा की। आयोजकों ने देवता के मंदिर में रिंगाल की 16 टोकरियों में नए अनाज का प्रसाद रोट, अरसे, मालपूवे, फल, फूल, वस्त्र और आभूषण आदि रखे। दोपहर को गांव की महिलाएं और ध्याणियां भूमियाल देवता के मंदिर मज्याड़ी से रिंगाल की 16 टोकरियों को सिर पर लेकर गांव से लगभग तीन किमी दूर स्थित भरसर देवता के मंदिर तक लाईं। जहां पर भरसर और घन्याल देवताओं के मिलन के क्षणों को देखकर लोग भावुक हुए। ग्रामीण बताते हैं बारह साल की अवधि में होने वाला धार्मिक कार्यक्रम इस बार 31 साल में हुआ। इस दौरान कर्णप्रयाग के विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने भी देव दर्शन किए। देर शाम को भरसर देवता के मंदिर में देव निशाण वापस गांव पहुंचे। यहां वैदिक पूजा और भंडारे के साथ जात यात्रा का समापन हुआ। इस दौरान आयोजन समिति के लक्ष्मण सिंह नेगी, दिनेश सिंह नेगी, प्रधान दीपक मालगुड़ी, जिला पंचायत सदस्य भगत सिंह नेगी, बृजेश कुंवर, मनवर नेगी सहित सुगड़, मालसी, सिरणा, पुनगांव, कांसुवा और भलसौं आदि गांवों के ग्रामीण मौजूद थे। इस दौरान गांव में लगे बाजार में लोगों ने जमकर खरीदारी भी की।