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भेल, नगर निगम, जलसंस्थानों की जमीनों को नही हो पाया सीमांकन

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हरिद्वार। भेल, नगर निगम और जल संस्थान के बीच करोड़ों रुपये कीमत की जमीनों को लेकर जारी विवाद डीएम की मौजूदगी में हुए सर्वे के बाद भी खत्म नही हो पाया। आखिरकार कई घंटे की माथापच्ची करने के बाद इस बात पर सहमति बनी कि तीनों विभागों के अफसर राजस्व अभिलेखों के अनुसार एक माह के भीतर जमीन चिन्हित कर सीमांकन करेंगे।
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भगत सिंह चौक, टिबड़ी समेत कई स्थानों पर भेल और नगर निगम के बीच करोड़ों रुपये कीमत की जमीनों के भूस्वामित्व को लेकर विवाद है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां एक तरफ दोनों विभाग भू-स्वामित्व को लेकर आपस में झगड़ रहे हैं वहीं सैकड़ों लोगों ने दोनों विभागों के बीच पिछले कई साल से जारी विवाद का फायदा उठाते हुए न सिर्फ जमीनों का फर्जी बैनामा करा लिया वरन कई आवासीय व्यावसायिक निर्माण कर लिए। शनिवार को डीएम दीपक रावत ने भेल, नगर निगम और जलसंस्थान के अधिकारियों के साथ भगत सिंह चौक के पास जमीनों का सर्वे किया, लेकिन कई घंटे की माथापच्ची के बाद यह तय नही हो पाया कि भेल, नगर निगम और जलसंस्थान की जमीन कहां पर है। मौके पर मौजूद तीनों विभागों के अफसर यह साबित नही कर पाए कि उनकी जमीन कौनसी है। बाद में इस बात पर सहमति बनी कि तीनों विभागों के अफसर राजस्व विभाग के अभिलेखों के मुताबिक अपने-अपने विभागों की जमीनों को चिन्हित करने के साथ ही उसका सीमांकन करेंगे। संयुक्त सर्वे के दौरान नगर आयुक्त नितिन भदौरिया, भेल के नगर प्रशासक संजय पंवार आदि अधिकारी मौजूद थे।
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आखिर कौन कर रहा सरकारी जमीनों की रजिस्ट्री
सर्वे के दौरान यह प्रकरण सामने आने पर कि सरकारी जमीनों की रजिस्ट्री तक कर दी गई है। डीएम दीपक रावत ने मौके पर मौजूद अफसरों से कहा कि पता लगाएं कि ऐसा कौन सा व्यक्ति है तो सरकारी जमीनों की रजिस्ट्री कर रहा है। डीएम रावत ने कहा कि उसे चिन्हित कानूनी कार्रवाई की जाए।
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अटकी रही लोगों की सांसें
जिलाधिकारी की मौजूदगी में हुए संयुक्त सर्वे को लेकर अनाधिकृत तरीके से सरकारी जमीनों पर कब्जा निर्माण करने वालों की सांसें अटकी रही। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि प्रशासन उनके आशियानों को जमीदोज न कर दे। कई लोगों ने तो डीएम से ही पूछ लिया कि क्या अतिक्रमण अभियान चलाकर हम सबको हटाया जाएगा। डीएम ने जवाब दिया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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