हरिद्वार। संस्कृत महाकाव्य गंगापुत्रावदानम को इस साल साहित्य अकादमी की ओर से संस्कृत भाषा में सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ के तौर पर चयनित किया गया है। हरिद्वार के आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के प्रो. निरंजन मिश्र द्वारा लिखित इस महाकाव्य में मातृसदन के ब्रह्मचारी निगमानंद के जीवन चरित्र का वर्णन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस साल साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए जिन लेखकों का चयन किया गया है उसमें प्रो निरंजन मिश्र भी शामिल हैं। ज्ञात हो कि प्रो मिश्र को इससे पहले मध्यप्रदेश संस्कृत अकादमी की ओर से कालीदास पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। गंगापुत्रावदानम को को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नाकोत्तर पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इसके साथ ही उत्तराखंड लोकसेवा आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा के पाठ्यक्रम के तौर पर सम्मलित किया है। दूसरी ओर प्रो निरंजन मिश्र को साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कार के लिए चयनित किए जाने पर बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों में खुशी की लहर है। इसी कड़ी में एक कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय में किया गया जिसमें महाविद्यालय के प्राचार्य डा. भोला झा ने कहा कि महाविद्यालय का सौभाग्य है कि ऐसे साहित्यकार महाविद्यालय में सेवा दे रहे है। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डा. बीके सिंह देव, डा. मंजुनाथ एसजी, डा. रविंद्र कुमार, डा. मंजू पटेल, डा. संयोगिता, गौरव, मनोज कुमार, नरेश आदि उपस्थित रहे।