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31 साल बाद होगा देवभाइयों का मिलन

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आदिबदरी। तहसील के मल्ली मज्याड़ी में 31 साल बाद दो देवताओं (भाइयों) का मिलन होगा। मल्ली मज्याड़ी गांव में ईष्ट देवता घन्याल और भरसर देवता की जात का 24 दिसंबर से आयोजन होगा जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। जात के समापन पर दोनों देवताओं को मिलन होगा।
गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग मुकुंद सिंह कहते हैं कि तीसरी बार इस जात का आयोजन किया जा रहा है। हालांकि जात हर 12 साल में आयोजित करने का प्रावधान है, लेकिन सभी ग्रामीणों को एक साथ समय न मिलने के कारण यह जात इस बार 31 साल में हो रही है। गांव के लक्ष्मण सिंह नेगी ने बताया कि युवा पहली बार इस जात में शामिल होंगे। 24 दिसंबर को भूमियाल देवता की पूजा के साथ जात शुरू होगी, जबकि 26 दिसंबर को देव निशाणों के साथ घन्याल देवता के मंदिर से तीन किमी दूर भरसर देवता के मंदिर तक छाबड़ी के साथ जात का आयोजन होगा। घन्याल और भरसर देवताओं के मिलन के बाद यात्रा वापस आएगी। ग्रामीण दिनेश नेगी ने बताया कि 31 साल बाद हो रहे आयोजन के लिए गांव की ध्याणियां और प्रवासी सभी गांव पहुंच चुके हैं।
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बीर भड़ सौरू और भौंरू का गांव है मज्याड़ी
चांदपुर गढ़ के राजा कनकपाल के दरबार में दो वीर भड़ सौंरू और भौंरू मज्याड़ी गांव के थे। गांव के बुजुर्ग सज्जन सिंह किवदंतियों का हवाला देते हुए बताते हैं कि नवीं सदी के करीब राजा कनकपाल के दरबार में दोनों वीर भड़ों की बहादुरी के चर्चे थे। राजा के महल के लिए जब सीढ़ियों की जरूरत पड़ी तो दूधातोली पर्वत से सौंरू और भौंरू दो सीढ़ियां उठाकर महल तक लाए। टनों भारी सीढ़ियां लाने के बाद जब सौंरू और भौंरू घर के समीप पहुंचे तो दोनों की तबीयत बिगड़ गई और मौत हो गई। आज भी गांव में सौंरू और भौंरू का स्मारक है।
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