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हिमालय के लोग हैं पर्यावरण के पुश्तैनी जानकार: टावरी

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श्रीनगर। पूर्व आईएएस डा. कमल टावरी का कहना है कि हिमालय के लोग पर्यावरण के पुश्तैनी जानकार हैं, लिहाजा वे प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और संरक्षण का काम साथ-साथ करते चलते हैं। दुनिया में हिमालय वासियों की पर्यावरण संरक्षण में अलग पहचान है। आज पर्यावरण संरक्षण को स्वरोजगार के साथ जोड़ना जरूरी है ताकि लोगों को इस बात का अहसास हो कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रहरी भी हैं।
डा. टावरी बृहस्पतिवार को यहां गढ़वाल विश्वविद्यालय के एमएसडब्ल्यू विभाग के सभागार में पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित गोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। गोष्ठी पर्वतीय विकास केंद्र और रूरल बिजनेस हब फाउंडेशन की ओर से आयोजित की गई थी। प्रो. जेपी पचौरी ने कहा कि उत्तराखंड में कई ऐसे लोग हैं जो बिना प्रचार-प्रसार के पर्यावरण संरक्षण का कार्य कर रहे हैं।
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इससे पूर्व आईएस कमल टावरी, प्रो. जेपी पचौरी और डा. मोहन सिंह पंवार के मार्ग निर्देशन में बनी पुस्तक ‘उत्तराखंड हिमालय में आशा की किरणें’ का विमोचन भी किया गया। पुस्तक की विषय वस्तु डा. अरविंद दरमोड़ा और प्रेम पंचोली ने लिखी है। इस मौके पर डा. दरमोड़ा, प्रो. किरण डंगवाल, डा. जेपी भट्ट, आदि मौजूद थे।

महिलाओं को किया सम्मानित
श्रीनगर। गोष्ठी के दौरान शहर क्षेत्र की दो महिलाओं गोदांबरी देवी और सुनीता देवी को सम्मानित किया गया। दोनों महिलाएं गाय पालन से स्वरोजगार कर रही हैं।
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