गोपेश्वर। जिलाधिकारी आशीष जोशी ने अमृत गंगा पेयजल योजना के मुख्य स्रोत पर निर्माणाधीन फिल्टर टैंक के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जल निगम के अधिकारियों को हर हाल में जनवरी माह तक फिल्टर टैंक का निर्माण कार्य पूरा कर नगरवासियों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
गोपेश्वर नगर की पेयजल समस्या दूर करने के लिए वर्ष 2006 में शासन से अमृत गंगा पेयजल योजना को स्वीकृति मिली। 16 किमी लंबी इस योजना के लिए 7 करोड़ 56 लाख 6 हजार के सापेक्ष जल निगम को 7 करोड़ 20 लाख 6 रुपये अवमुक्त हुए। निगम ने सभी धनराशि खर्च कर दी, लेकिन अभी तक मुख्य स्रोत पर फिल्टर टैंक का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। गोपेश्वर नगरवासियों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। बुधवार को डीएम आशीष जोशी जल निगम व जल संस्थान के अधिकारियों के साथ अमृत गंगा पेयजल योजना के मुख्य स्रोत पर गए। उन्होंने स्रोत पर फिल्टर लगाने के लिए चल रहे कार्यों को हर हाल में जनवरी तक पूरा करने के निर्देश जल निगम के अधिकारियों को दिए। जल निगम के अधिकारियों ने कहा कि बरसात के दौरान अमृत गंगा में बहने वाले सूक्ष्म मिट्टी के कणों को फिल्टर से रोकना मुश्किल है। इस पर डीएम ने स्रोत पर ही तीन एमएलडी ट्रीटमेंट के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे नगर में स्वच्छ जलापूर्ति हो सके।
अमृत गंगा पेयजल योजना से जलापूर्ति की मांग
गोपेश्वर। मंडल घाटी के सिरोली गांव के ग्रामीणों ने भी अमृत गंगा पेयजल योजना से उनके गांव को लाभान्वित करने की मांग उठाई। सिरोली गांव के युवक मंगल दल अध्यक्ष सुनील बिष्ट ने कहा कि पेयजल आपूर्ति न होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर डीएम आशीष जोशी ने जल निगम व जल संस्थान के अधिकारियों को गांव के समीप स्थित पेयजल स्रोत की जांच कर जिला योजना के तहत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।