श्रीनगर। ऊर्जा निगम के अधिकारी और कर्मचारी अपनी मांगां को लेकर 21 दिसंबर को जनजागरण रैली निकालेंगे। उन्होंने सरकार पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को लाभ देने के बावजूद उनका हिस्सा छीनने की कोशिश की जा रही है। कहा कि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला तो पांच जनवरी से बेमियादी हड़ताल की जाएगी।
रविवार को उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के बैनर तले तीनों ऊर्जा निगमों में कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों की बैठक संपन्न हुई। इस मौके पर कहा गया कि सरकार उनको हड़ताल करने के लिए मजबूर कर रही है। कर्मचारियों को जो वेतन-भत्ते वर्ष 1979 से मिलते आ रहे हैं, उसे प्रदेश सरकार छीनने पर उतारू है। सरकार समयबद्ध वेतनमान में परिवर्तन कर रही है। साथ ही पे मेट्रिक्स को बदलकर सेवा नियमावली में भविष्य के लिए विसंगति पैदा कर रही है।
उन्होंने कहा कि तीनों निगम अपना व्ययभार वहन करने के बाद सरकार को लाभांश देते हैं। तब भी उनके हक पर डाका डाला जा रहा है। प्रबंधन व सरकार में बैठे कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री को गलत जानकारी देकर गुमराह कर रहे हैं।
इस अवसर पर बताया गया कि 21 दिसंबर को श्रीनगर में जनजागरण रैली निकाली जाएगी। फिर भी सरकार ने उनकी मांगों को नहीं सुना तो 26 दिसंबर को तीनों ऊर्जा निगमों के प्रबंध निदेशकों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। 4 जनवरी को देहरादून में सचिवालय तक रैली निकालेंगे। इसके बावजूद भी सकारात्मक परिणाम नहीं निकलने पर पांच जनवरी से सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे।
बैठक की अध्यक्षता एसएस बर्तवाल और संचालन एमपी लखेड़ा ने किया। आरपी नौटियाल, अनिल गुसाईं, यतेंद्र कुमार, नरेंद्र बहुगुणा, महिपाल, दिनेश जोशी और गणेश चौहान आदि ने विचार व्यक्त किए।