कीर्तिनगर। गांव में सड़क नहीं होने से प्रसूता ने अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में ही दम तोड़ दिया। प्रसव के बाद तबियत बिगड़ने पर ग्रामीण प्रसूता को डंडी से अस्पताल ले जा रहे थे। घटना कीर्तिनगर के राड़ागाड़ गांव की है। इस गांव के लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए करीब पांच किमी का पैदल सफर तय करना पड़ता है।
मिली जानकारी के मुताबिक राड़ागाड़ निवासी ऊषा देवी (28) पत्नी अनिल सिंह का शुक्रवार मध्यरात्रि को प्रसव हुआ था, लेकिन प्रसव के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन प्रसूता को शनिवार सुबह डंडी के सहारे सड़क तक लाए, लेकिन हालत नाजुक होने से प्रसूता ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। तब ग्रामीण प्रसूता के शव को वापस गांव ले आए।
सूचना पर सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। टीम में डा. रविंद्र राणा, डा. विनय शर्मा, एएनएम अरुणा असवाल शामिल थे। डा. रविंद्र राणा ने बताया कि एएनएम ने प्रसूता को प्रसव के लिए कीर्तिनगर अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी, लेकिन परिजनों ने गांव में ही प्रसव करा लिया। डा. राणा ने बताया कि 108 सेवा के माध्यम से उन्हें पता चला कि प्रसूता की मौत हो गई है। डा. राणा ने बताया कि नवजात शिशु पूरी तरह स्वस्थ है। परिजन प्रसूता को समय पर अस्पताल ले आते तो उसकी जान बच सकती थी। एसडीएम नुपूर वर्मा का कहना है कि इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। शिकायत दर्ज होने पर जांच की जाएगी। इधर, ग्रामीणों ने बताया कि ऊषा का यह तीसरा प्रसव है। इससे पहले वह दो बच्चों को जन्म दे चुकी है। दोनों बच्चे पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं। ऊषा भी पूर्ण रूप से स्वस्थ थी।