श्रीनगर। चौरास शहीदी मेले की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में गढ़वाली कवि सम्मेलन में कवियों ने सामाजिक व्यवस्थाओं के साथ ही उत्तराखंड की दशा-दिशा और पलायन जैसे मुद्दों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
रविवार शाम कवि सम्मेलन का शुभारंभ डा. प्रताप भंडारी ने किया। कवि सम्मेलन के संयोजक कलश संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश सेमवाल ने ‘राजा का कुरच्यां छा कनैकी बी उठा खड़ा’ रचना सुनाई। सहसंयोजक संदीप रावत ने ‘एक बीज सब्र को हमारा भीतर होण चेंद हवा कै बी दिशा हो धीरज नी खोण चेंद’ कविता सुनाते हुए धैर्य व और संयम के महत्व को बताया।
हास्य कवि जगदंबा चमोला ने ‘न रीति क्वै रिवाज लोग सुद्दि लग्यां धक्क मां ढोल दमों पगल्दि ल्यंया पिपरी बैंक ठयक्का मा’ं कविता से उत्तराखंड में आ रहे बदलाव पर व्यग्ंय कसा। बृजमोहन सजवाण ने ‘हमरा कर्ता धर्तनु आज हमारि कन बिज्जति करै’, दिलवर रावत ने ‘भितर मूसू की धमाचौकड़ी भैर ताला लग्यां छन’, मोहित नेगी ने ‘मैं आंख्यू की पीर ते जिकुड़ा मां रलौण चांद’ू, राकेश जिरवाण ने ‘घर की खुद’, बीना बेंजवाल ने ‘गौं की कूड़ी ह्वेयी खंदार बांजा पड़ी नाजेली सार’, कविता भट्ट ने ‘दुनिया का म्येला मा यकुली रौण’, आरती पुंडीर ‘मि जाणदु म्येरों ज्यूं जाणदू’ और अनीता काला ने ‘क्यै ह्वे युं मै विराणी’ कविता सुनाई।
इस अवसर पर मेला आयोजन समिति अध्यक्ष जयकृष्ण भट्ट, डा. सुभाष पांडे, डा. संजय पांडे, मेला प्रभारी विनोद चमोली, अनिल बिष्ट, कमलेश थपलियाल, रामलाल नौटियाल और नरेंद्र भंडारी आदि उपस्थित थे।
मेले में आज
मंगलवार को विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लोकगीत व लोकनृत्य और स्थानीय कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।