हरिद्वार। जूना अखाड़े में ब्रह्मलीन महंत रामानंद गिरि महाराज की षोडशी मनाई गई। जिसमें सभी 13 अखाड़ों के संत महंतों ने ब्रह्मलीन महंत रामानंद गिरि महाराज को नमन किया।
इस मौके पर महंत देवानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि संतों का जीवन गंगा जल के समान होता है। ब्रह्मलीन महंत रामानंद गिरि महाराज भी सदा लोक कल्याण के लिए समर्पित रहते थे। उन्होंने कहा कि संत ही भक्तों को ईश्वर से मिलाने का मार्ग दिखाते हैं। ब्रह्मलीन महंत रामानंद गिरि त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। महंत मनोहर पुरी ने कहा कि जीवन में मनुष्य को सदा अपने गुरुजनों की सच्चे मन से सेवा करनी चाहिए। महंत मुन्ना गिरि, महंत शिवम पुरी महाराज ने कहा कि संत ही ईश्वर से भक्तों को साक्षात्कार कराते हैं। मानव को कभी जीवन में अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है। श्रद्धांजलि सभा में श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने बताया ब्रह्मलीन महंत रामानंद गिरि महाराज कानपुर में आनंदेश्वर मंदिर के थानापति थे। श्रद्धांजलि देने वालों में महंत शिवशंकर गिरि, महंत देवानंद सरस्वती, महंत भगवत पुरी, महंत महेश पुरी, महंत प्रेम गिरि, महंत मनोहर पुरी, महंत मुन्ना गिरि, महंत पदम गिरि, महंत शिवम पुरी, महंत भास्कर गिरि, महंत पंजाब गिरि, महंत आकाश गिरि आदि शामिल थे।