कर्णप्रयाग। ब्लाक सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने खनन बंदी से ब्लाक में मनरेगा कार्य प्रभावित होने की समस्या उठाई। प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने कहा कि खनन बंद होने से जहां रेत की समस्या बन गई है, वहीं एक से पांच किमी तक के पैदल दूरी के गांवों में सामान ढुलान के लिए ट्रांसपोर्टेशन का जीएसटी नंबर नहीं होने से भी कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
ब्लाक प्रमुख राधा देवी आर्य की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ग्राम प्रधानों ने कहा कि सड़क से जुड़े गांवों और पैदल दूरी के गांवों में योजना के तहत एक ही मापन की कार्ययोजनाएं विसंगति का कारण बन रही हैं। साथ ही सीमेंट, रेत सहित अन्य सामग्री ढुलान के लिए जीएसटी नंबर और योजनाओं में व्यवस्था न होने से भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हर साल श्रमांश के तहत मजदूरी बढ़ रही है, लेकिन मापन प्रक्रिया एक जैसी है। यही नहीं लोकल स्तर पर काम करने वाले कुशल कामगार 600 रुपये और अकुशल 500 रूपये की मजदूरी ले रहे हैं, जबकि मनरेगा में महज 175 रुपये दिए जा रहे हैं। ऐसे में काम की गुणवत्ता को बरकरार रखना किसी चुनौती से कम नहीं। ब्लाक सभागार में प्रधानों ने पिछले भुगतान, शौचालयों की स्थिति, व्यक्तिगत काम और मानव दिवस को बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में मनरेगा अधिकारियों, कर्मियों और ग्राम प्रधानों ने आपसी तालमेल से काम करने पर बल दिया गया। बैठक में कनिष्ठ उपप्रमुख सुभाष रावत, खंड विकास अधिकारी एमपी भट्ट, मनरेगा परियोजना अधिकारी रुचि, प्रधान संगठन के अध्यक्ष खिलदेव सिंह रावत सहित ब्लाक के ग्राम्य विकास अधिकारी, ग्राम्य पंचायत विकास अधिकारी, अवर अभियंता, प्रशासनिक सहायक और ग्राम प्रधान मौजूद थे।