गोपेश्वर। मैठाणा में चल रहे चार दिवसीय अलकनंदा पर्यटन, सांस्कृतिक ग्रामीण विकास मेले का शुक्रवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन हो गया। मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें कलश साहित्यिक संस्था से जुड़े कवियों ने कविताओं के जरिए पहाड़ की संस्कृति, रीति-रिवाज और बोली-भाषा को बचाने का आह्वान किया।
मैठाणा खेल मैदान में आयोजित मेले का समापन राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी ने किया। उन्होंने कहा कि मेलों के माध्यम से सरकारी विद्यालयों की दिशा व दशा पर भी चर्चा-परिचर्चा होनी चाहिए। विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए समाज के सभी लोगों को आगे आने की जरूरत है। इस दौरान आयोजित कवि सम्मेलन में कलश संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश सेमवाल ने मूसा जाणां पराण बिरला होयूं खेल, कने होलो राजा-प्रजा कु सच्चो मेल..., मुरली दीवान ने जैमू पौधी माया पड़ी, तै ही फेर लून द्योंणा..., तेजपाल निर्मोही ने बिसरीगे जब हम अपड़ा, कर्मकांड तैं, त क्वे न क्वे परकोप त हौणे च..., बृजेश रावत ने फैसनो बुखार, अब त गौं बजार..., नितीश भंडारी ने जै ही देखा, स्वे देरादून बटा लग्यूं च..., निधि सती ने नन्हीं सी सुबह हुई, नन्हीं सी खोल पंखुड़ियां..., लक्ष्मी प्रसाद मलगुड़ी ने डिंकरु जन मुंड बण्यूं, चुस्ति जन पैंट... कविता का व्याख्यान किया। इस दौरान हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में महिला मंगल दल मासौ प्रथम, मैठाणा द्वितीय और अलकनंदा तृतीय स्थान पर रहा। मेले में विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी विभागों की ओर से स्टॉल भी लगाए गए। इस मौके पर मानवाधिकार संघ के जिलाध्यक्ष जसवंत लोहानी, गंगा समग्र समिति के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह नेगी, मेला अध्यक्ष चंडी प्रसाद थपलियाल और प्रदीप बुटोला आदि मौजूद थे।