पांच जनवरी से प्रदर्शित होगी ‘बौड़िगे गंगा’ फिल्म
-- समाजसेवी संगठनों के बाद बैकफुट पर थिएटर संचालक
-- संचालक ने कहा, गढ़वाली भाषा संस्कृति का सम्मान करते हैं
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। आंचलिक बोली भाषा की फिल्में चलाने से पहले ढाई लाख की डिमांड करने वाले रामा पैलेस के संचालक दबाव के बाद आखिरकार बैकफुट पर आ गए हैं। बताया कि ‘बौड़िगे गंगा’ फिल्म पांच जनवरी से हॉल में प्रदर्शित की जाएगी। सिनेमा हॉल के प्रबंधक अशोक कुमार ने यह भी कहा कि वह गढ़वाली बोली, भाषा और संस्कृति का सम्मान करते हैं, उन्होंने कभी भी थियेटर में आंचलिक फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर इनकार नहीं किया है।
गढ़वाली फिल्म बौड़िगी गंगा के प्रदर्शन को लेकर आंचलिक फिल्मों के बाबत उपजे विवाद के मामले में रामा पैलेस प्रबंधन ने बयान जारी किया है। थियेटर के प्रबंधक अशोक कुमार ने यह भी कहा कि गढ़वाली फिल्म बौड़िगी गंगा को ऋषिकेश के रामा पैलेस में प्रदर्शन के लिए ढाई लाख रुपये रेंट की मांग उनके द्वारा नहीं की गई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष- 2006 से ई- सिटी डिजिटल सिनेमा, मुंबई को थियेटर लीज पर दिया गया है। लिहाजा हॉल में फिल्मों के प्रदर्शन का निर्णय उन्हीं के स्तर पर लिया जाता है। कहा कि हमें उत्तराखंड की आंचलिक फिल्मों को हॉल में लगाने पर कोई आपत्ति नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह ऋषिकेश में फिल्म प्रदर्शित करने में हर प्रकार के सहयोग के लिए हमेशा तैयार हैं।
रेंट को लेकर अब तक नहीं बनी सहमति
ऋषिकेश। फिल्म निर्माता अनिरुद्ध गुप्ता ने बताया कि बौड़िगी गंगा फिल्म को लेकर उपजा विवाद दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता के बाद सुलझ गया है। सिनेेमा हॉल के प्रबंधक अशोक कुमार के साथ उनका कोई विवाद नहीं है। फिल्म के प्रदर्शन को लेकर चल रहा विवाद ई- सिटी डिजिटल मुंबई के साथ था। प्रबंधक अशोक कुमार की मौजूदगी में विवाद को सुलझा लिया गया है। गुप्ता ने बताया कि अगले माह 5 जनवरी को फिल्म हॉल में प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही बताया कि सिनेमा हॉल में रेंट को लेकर थियेटर प्रबंधन ने सहयोग का भरोसा दिया है।
फिल्म न चलाने पर विरोध में उतरे थे संगठन
ऋषिकेश। थिएटर में आंचलिक फिल्में न चलाने के विरोध में कई संगठन उतर गए थे। उक्रांद युवा प्रकोष्ठ के नगर अध्यक्ष मोहित डोभाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सोमवार को तहसीलदार रेखा आर्य के माध्यम से उपजिलाधिकारी हर गिरि को ज्ञापन भेजा। जिसमें उन्होंने सिनेमा घर में आंचलिक फिल्म के प्रदर्शन पर एडवांस रेंट लेने का विरोध किया है। वहीं गढ़वाल महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डा. राजे नेगी ने आंचलिक फिल्मों को राज्य के थियेटरों में प्रदर्शित करने में फिल्म निर्माता के समक्ष आने वाली दुश्वारियों को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। इसी तरह रानीपोखरी शरदोत्सव समिति ने गढ़वाली फिल्म को सिनेमा हॉल में नहीं लगाने पर आरपार की लड़ाई का ऐलान किया था। समिति संयोजक नरेश उनियाल का कहना है कि सरकार को राज्य के थियेटरों में आंचलिक फिल्मों के प्रदर्शन को अनिवार्य करना चाहिए। जबकि अठ्ठूरवाला ग्राम प्रधान मंजू चमोली, सामाजिक कार्यकर्ता रविंद्र बैलवाल ने गढ़वाली फिल्म को थियेटर में प्रदर्शित करने के लिए अग्रिम धनराशि की मांग का विरोध जताया।