अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
अखिल भारतीय संत समिति ने धर्म संसद में पारित चार बच्चे पैदा करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। समिति ने कहा कि यह बचकाना प्रस्ताव है, जिसका व्यवहारिकता से कोई लेना देना नहीं। दो बच्चों से अधिक पालना हिंदू समाज के लिए मुश्किल है। इस विषय को लेकर संत समिति की राष्ट्रीय बैठक शीघ्र बुलाई जाएगी।
गौरतलब है कि दो दिन पहले कर्नाटक के उडुपी में हुई धर्म संसद में चार बच्चों के होने का प्रस्ताव पारित किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि जब तक देश में समान नागरिक कानून लागू नहीं हो जाता तब तक हिंदुओं को भी चार बच्चे पैदा करने चाहिए। संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगंबर ने पत्रकारों को बताया कि धर्म संसद में यह प्रस्ताव संत गोविंद गिरि की ओर से रखा गया। यह बैठक माधवाचार्य की अध्यक्षता में हुई। प्रस्ताव को सबने स्वीकार कर लिया। हठयोगी ने कहा कि संत समिति प्रस्ताव को सिरे से खारिज करती है। पहले संत समाज हिंदुुओं के शेष बच्चों का व्यय वहन करे। बचपन से लेकर उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा और नौकरी लगने तक अतिरिक्त बच्चे का खर्च मां -बाप कहां से लाएंगे, संत पहले यह बताएं। उन्होंने बेवजह का प्रस्ताव पारित किया गया है। हिंदू समाज दो बच्चों से खुश है और अपने परिवार को ऊंचाई तक ले जाने के काम में जुटा हैं। होना तो यह चाहिए कि संत समाज मुस्लिमों के बीच जाकर उन्हें कम बच्चों का महत्व समझाए। दुख का विषय है कि संत सारा धन तो समाज से वसूलते हैं, किंतु समाज हित के लिए एक पैसा भी खर्च नहीं करते। जिस दिन हिंदू परिवारों को संतों और मठों की अकूत संपदा से पैसा मिलने लगेगा उस दिन वें अधिक बच्चे पैदा कर लेंगे। कहा कि संत समिति शीघ्र ही राष्ट्रीय बैठक बुलाकर धर्म संसद के प्रस्ताव के विरोध में प्रस्ताव पारित करेगी।