अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मातृ सदन ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कहा कि शराब और खनन माफिया तीर्थनगरी की सांस्कृतिक पहचान को नष्ट कर रहे हैं। उधर मातृसदन में 29 वें दिन भी अनशन जारी रहा।
मातृसदन के परमाध्यक्ष शिवानंद ने कहा कि भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान ने खनन को लेकर जो रिपोर्ट सौंपी थी, उसके बाद वन निगम ने बिना देरी के रिपोर्ट और एमओइएफ भेजी। जिसके बाद अगले दिन से खनन शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि एनजीटी ने खनन को स्थगन में रखा है। एनजीटी ने खनन खोलने के संबध में जवाब मांगा और 7 दिनों में रिपोर्ट मांगी। दो जगहों से खनन को लेकर पाबंदी होने पर यदि एनजीटी खनन खोलने की अनुमति भी देती है तो भी खनन बंद रहेगा, खनन खोलने को लेकर सीपीसी का फैसला बरकरार रहेगा। उन्होने कहा कि आए दिन खनन माफिया खनन खुलवाने को लेकर कई तरीकों से काम कर रहे हैं। जिसमे सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत बिना यह कार्य संभव नही है। यदि एनएच 74 गड़बड़ी मामले में किसी अधिकारी को लेकर एसआईटी जांच की जा सकती है, तो राष्ट्रीय नदी गंगा को लेकर खनन में हो रहे घोटाले को लेकर एसआईटी क्यों नहीं बननी चाहिए। खनन खोलने को लेकर अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। हतमाल, देवपुर से खनन की जानकारियां एसएमएस से जिलाधिकारी को दी जाती है तो कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि खनन की जानकारी देने पर पत्रकारों पर हमले होने पर जिलाधिकारी को स्वयं जाकर खनन की वैधता की जानकारी लेनी चाहिए थी। उधर मातृसदन में 29 वें दिन भी अनशन जारी रहा।