श्रीनगर। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का संचालन कर रही कंपनी के झूठे आश्वासनों से एक परियोजना प्रभावित युवक लाखों का कर्जदार बन गया है। परियोजना कंपनी के आश्वासन पर युवक ने अपनी जमीन शिक्षा विभाग को दान में दे दी।
कंपनी के आश्वासन पर युवक ने स्कूल भवन का निर्माण करवाया। तीन साल पहले भवन बनकर तैयार हो गया है, लेकिन आज तक युवक को मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाया है। इसके चलते उस पर लोगों की लाखों की देनदारी हो गई है। युवक ने अब भुगतान न होने पर परिवार सहित परियोजना बैराज में भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है।
राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज दिखोल्यूं/डुंगरीपंथ (पूर्व में हाईस्कूल) का विद्यालय भवन काफी पुराना हो चुका है। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का काम शुरू होने पर निर्माणदायी कंपनी एएचपीसीएल ने नए भवन निर्माण का आश्वासन दिया। वर्ष 2010 में दिखोल्यूं निवासी विजयराम भट्ट ने विद्यालय के लिए दो नाली भूमि दान दे दी। इसके एवज में उसको भवन निर्माण का ठेका मिल गया।
विजयराम तीन साल पूर्व भवन निर्माण कर चुका है, लेकिन उसको आज तक मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ। कंपनी ने उसको लगभग 11 लाख रुपये का भुगतान करना है। जिला पंचायत सदस्य प्रकाश बुटोला का कहना है कि कंपनी आज-कल कहकर युवक को घूमा रही है। इससे परेशान युवक ने सपरिवार धरने पर बैठने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि वह भी क्षेत्र के लोगों के साथ युवक के समर्थन में धरना देंगे।
मंत्रियों के निर्देश भी बेअसर
श्रीनगर। अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी/जीवीके पर सरकार और शासन के आदेशों का कोई असर नहीं पड़ रहा है। दो साल पूर्व गठित मंत्रिमंडलीय समिति ने सुनवाई के दौरान विजय को तत्काल भुगतान करने के निर्देश कंपनी को दिए थे। इस पर कंपनी के अधिकारियों ने समिति के समक्ष भुगतान की बात कही थी, लेकिन एक धेला नहीं दिया। वर्तमान राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने भी कंपनी को भुगतान के निर्देश दिए हैं, लेकिन कंपनी पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
फंड की कमी चल रही है। अभी विद्युत उत्पादन से कुछ पैसा मिला है। प्राथमिकता के आधार पर थोड़ा भुगतान किया जा रहा है। वाईआर शर्मा, जनसंपर्क अधिकारी एएचपीसीएल श्रीनगर
सन्दीप