श्रीनगर। संविधान दिवस के अवसर पर गढ़वाल विवि में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि संविधान सामाजिक परिवर्तन का उपकरण है। वक्ताओं ने संविधान दिवस को प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में आवश्यक रूप से मनाए जाने की बात कही।
रविवार को राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से बिड़ला परिसर स्थित सीनेट हाल में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो. सीएस सूद ने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में कानून, न्याय, स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों को जोड़ा गया है, लेकिन आज भी इन सिद्धांतों को धरातल पर लाने की आवश्यकता है ताकि समाज के सभी वर्ग उन्नति में अपना योगदान दे सकें।
प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि हमें भारतीय संविधान में वर्णित अधिकारों के साथ-साथ अपने मूल कर्तव्यों को जीवन में उतारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस को प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में मनाया जाना चाहिए ताकि छात्रों को नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान प्राप्त हो और वे बेहतर नागरिक बन सकें।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. एमएम सेमवाल ने कहा कि भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है। यह दिवस इस संविधान की विशालता की जानकारी व मनन करने के लिए मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि संविधान सामाजिक परिवर्तन का उपकरण है। विवि के अवर अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने डा. बीआर अंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डा. मनीष मिश्रा ने किया।