गैरसैंण। पलायन आयोग की ओर से पलायन पर सुझाव मांगने की दृष्टि से आयोजित बैठक में जनप्रतिनिधियों ने बेबाकी से अपनी राय रखी। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पहाड़ में मूलत: बेरोजगारी और जंगली जानवर गांवों के लोगों का सुख-चैन छीन रहे हैं। फसलों को बंदर और सूअर नुकसान पहुंचा रहे हैं और मवेशियों को गुलदार मार रहा है। युवा रोजगार की तलाश में मैदानी क्षेत्रों में जा रहे हैं और पलायन हो रहा है। ऐसे में यहां रोजगार उपलब्ध कराने और जंगली जानवरों से निजात दिलाने की सबसे अधिक जरूरत है।
ब्लाक सभागार में पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर पलायन रोकने के लिए सुझाव मांगे। भलसों की प्रधान बैजयंती देवी और मूसों के प्रधान वीरेंद्र लाल ने बेरोजगारी और जंगली जानवरों का मुद्दा उठाया। अन्य ने पहाड़ के गांवों में आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी सुविधाओं के न होने से पलायन बढ़ने की बात कही। कहा कि पलायन के चलते स्कूलों में छात्र घट गए। सरकार इंतजाम करने के बजाए स्कूलों को बंद कर रही है, जिससे गांवों में बचे हुए परिवार भी पलायन कर जाएंगे। अपर आयुक्त ग्राम्य विकास डा. आरएस पोखरिया ने बताया कि पहाड़ में आड़ूू, बेड़ू, हिसर, तिमला, किन्गोड़ आदि से संबंधित उद्योग लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और जानवर नुकसान भी नहीं पहुंचाएंगे। जिला विकास अधिकारी आनंद सिंह ने बताया कि जिले में मटर की खेेती से किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। चालू वर्ष में करीब 1 करोड़ की मटर बेचने का लक्ष्य है। इस अवसर पर ज्येष्ठ उपप्रमुख कर्ण सिंह, कनिष्ठ उपप्रमुख मनोज कुमार, एसबीएमए के परियोजना प्रबंधक गिरीश डिमरी और जिला पंचायत सदस्य हीरा सिंह फनियाल सहित कई लोग मौजूद थे।