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एसआरएचयू का जर्मन यूनिवर्सिटी रोंसटोंक के साथ एमओयू

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बायोसाइंस के क्षेत्र में हो रहे शोध साझा करेंगे
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एसएचआरयू और जर्मनी की द यूनिवर्सिटी ऑफ रोंसटोंक संयुक्त रूप से करेंगे काम
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला।
शोध और तकनीक के क्षेत्र में स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी और जर्मनी की द यूनिवर्सिटी ऑफ रोंसटोंक संयुक्त रूप से काम करेंगे। इससे दोनों यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं को तकनीकी ज्ञान बढ़ाने में इसका लाभ मिलेगा। इस बाबत बुधवार को एसआरएचयू के कुलपति डॉ. विजय धस्माना की अगुवाई में रजिस्ट्रार नलिन भटनागर और रोंसटोक से आए डॉ. ओलफ वॉनहेर ने एमओयू पर साइन किए।
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कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि एसआरएचयू का फोकस छात्रों को महज डिग्री नहीं रोजगारपरक शिक्षा देना है। हाल ही में उत्तराखंड सरकार के उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र यूसैक विभाग और एसआरएचयू के बीच भी एमओयू साइन हुआ है। यूनिवर्सिटी के छात्र वहां पर इंटर्नशिप और ट्रेनिंग कर सकेंगे। रजिस्ट्रार नलिन भटनागर ने कहा कि एमओयू होने से एसआरएचयू में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र छात्राओं भी जर्मनी में हो रहे शोध और जानकारी को एक ही प्लेटफार्म पर हासिल कर सकेंगे। बायोसांइस की कांफ्रेंस में डॉ. ओलफ वानहेर ने यूनिवर्सिटी के कार्यक्षेत्र और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रोंसटोंक यूनिवर्सिटी की स्थापना करीब 600 साल पहले 1419 में हुई। रोंसटोंक के वैज्ञानिक डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने कहा कि बायोसांइस के क्षेत्र में हो रहे शोधों और कार्यों को ओर तेजी मिलेगी। सिस्टम बॉयोलाजी एडवांस तकनीक है, इससे माध्यम से रोगों की उत्पत्ति के कारणों को सुलझाया जा सकता है। साथ ही रोगों की रोकथाम के लिए औषधि को विकसित किया जा सकता है। इस दौरान डॉ. विजेन्द्र चौहान, डॉ. सुनील सैनी, डॉ. प्रकाश कैशवय्या, डॉ. मुश्ताक भारद्वाज, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. सुशील, डॉ. एमके नौटियाल, डॉ. अनुपम धस्माना आदि मौजूद रहे।
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