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प्रकृति से प्रेम करना सिखाती है हिंदू परंपरा

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प्रकृति से प्रेम करना सिखाती है हिंदू परंपरा
-- सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा, श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण में विराट हिंदुस्तान संगम अहम सहभागिता निभाएगा

अमर उजाला ब्यूरो
मुनिकीरेती-ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन में आयोजित विराट हिंदुस्तान संगम के तत्वावधान में राष्ट्रीय समरसता और स्वच्छता सम्मेलन के दूसरे व अंतिम दिन आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने राज्यसभा सांसद डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी व अन्य अतिथियों को हिंदू धर्म विश्वकोश ग्रंथ के 11 खंडों की प्रतियां भेंट की। बताया कि उक्त ग्रंथ केवल हिंदू तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कला, इतिहास, संस्कृति, सभ्यता, भाषा, साहित्य, दर्शन एवं विज्ञान समाहित है, जिससे समाज को समरसता व सामंजस्य का संदेश मिलता है।
सम्मेलन में राज्यसभा सांसद डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि हिंदू परंपरा मानवता के धार्मिक व व्यवहारिक पक्ष को उजागर करती है। वह मानव को केवल मानव से ही नहीं बल्कि प्रकृति से भी प्रेम करना सिखाती है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण में विराट हिंदुस्तान संगम अहम सहभागिता निभाएगा। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि अब सौगात में बुके नहीं बुक्स (किताबें) देने का समय आ गया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही लोगों के ज्ञान को बढ़ाया जा सके।
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उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म शाश्वत धर्म है, यह धर्म अपने अंदर वैदिक सनातन पद्धति को लिए दुनिया को विश्व एक परिवार है, का संदेश देता है। उन्होंने विश्व शौचालय दिवस पर शौचालय के प्रयोग का महत्व समझाते हुए सभी को शौचालयों के प्रयोग का संकल्प दिलाया। सम्मेलन में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, धर्मगुरु मौलाना मसहूद अहमद काजी, किरीट भाई व्यास, जैन मुनि स्वामी समर्पण सागर, फादर आचार्य विपिन जोशी आदि ने विचार रखे। इस अवसर पर विराट हिंदुस्तान संगम के राष्ट्रीय सचिव राजीव गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष डा. राजुल शर्मा, उपाध्यक्ष कार्तिक श्रीनिवासन, संयोजक डा. प्रशांत जैन, मोनिका गर्ग, अनुपमा गुप्ता, डा. मेघा शर्मा, नंदनी त्रिपाठी, आरके दीक्षित आदि मौजूद थे।
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