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सिर्फ मरहम-पट्टी तक सीमित सरकारी अस्पताल

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फोटो फाइल नेम-
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मरहम-पट्टी तक सीमित सरकारी अस्पताल
-- सरकार की अनदेखी से तीन तहसीलों की जनता परेशान
-- डॉक्टरों की कमी से अब ओपीडी चलाना भी हुआ मुश्किल

अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। एसपीएस राजकीय चिकित्सालय सरकारी अनदेखी के कारण महज शोपीस बनकर रह गया है। चिकित्सकों की कमी के चलते अस्पताल की ओपीडी भी ठीक से नहीं चल पा रही है। अस्पताल सिर्फ मरीजों की मरहम-पट्टी तक ही सीमित होकर रह गया है। यह आलम तब है जबकि यहां देश-दुनिया के सैलानियों की वर्ष भर आमद बनी रहती है, लेकिन उपचार की जरुरत पड़ने पर लोगों को निजी चिकित्सालयों की शरण लेनी पड़ती है।
सरकारी चिकित्सालय में तीन तहसीलों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। अस्पताल में फिजिशियन, बाल रोग व रेडियोलॉजिस्ट जैसे अहम पदों पर चिकित्सकों की तैनाती ही नहीं की जा सकी है। ऐसे में ऋषिकेश, नरेंद्रनगर और यमकेश्वर तहसीलों से इलाज की उम्मीद में सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को मायूसी हाथ लग रही है। खांसी-जुकाम तक के रोगियों को ओपीडी में चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध नहीं है। दुर्घटनाओं में घायल होकर अस्पताल लाए जाने वाले लोगों की महज मरहम-पट्टी कर रेफर कर दिया जा रहा है।
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खास बात यह है कि स्वास्थ्य महानिदेशक और मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से रोजाना अस्पताल की स्थिति का स्टेटस मांगा जाता है, जिनमें अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पहली ही पंक्ति में डॉक्टरों की कमी की बात लिख रहे हैं। बावजूद इसके आला अफसर डाक्टरों की कमी से उत्पन्न समस्या के प्रति गंभीर नहीं हैं। प्रतिदिन ओपीडी में पहुंचने वाले औसतन 500 मरीजों को फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ के नहीं होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लिहाजा लोग निजी अस्पतालों में महंगे खर्च पर इलाज कराने को मजबूर हैं। सरकार में बैठे जनप्रतिनिधियों को भी तीन तहसीलों की जनता की यह परेशानी नजर नहीं आ रही है।

इमरजेंसी भी राम भरोसे
सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी के लिए कागजों में छह ईएमओ के पद सृजित हैं, मगर यहां तैनाती सिर्फ तीन ईएमओ की है। इनमें से भी दो संविदा पर हैं। जिससे अस्पताल प्रशासन के लिए डॉक्टरों की कमी के चलते इमरजेंसी चलाना भी मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञों की किल्लत के चलते दुर्घटना आदि में जख्मी मरीजों के इमरजेंसी में पहुंचने पर उनकी मरहम-पट्टी कर उन्हें रेफर कर दिया जा रहा है।

अस्पताल में यह सृजित पद हैं खाली
तीर्थनगरी के एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में कहने को डॉक्टरों के 25 पद सृजित हैं, मगर अस्पताल के निर्माण के बाद से आज तक यहां 25 चिकित्सकों की तैनाती कभी नहीं रही। वर्तमान में अस्पताल में डेढ़ दर्जन से अधिक चिकित्सक तैनात ही नहीं हैं। जिनमें महिला चिकित्सा अधीक्षक, ईएनटी, हृदय रोग विशेषज्ञ, चिकित्साधिकारी कार्डियोलॉजी, एक निश्चेतक, रेडियोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, चमड़ी रोग, बर्न विशेषज्ञ, पांच ईएमओ, जीडीएसएमओ आदि पद लंबे अरसे से रिक्त चल रहे हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
डीजी और सीएमओ कार्यालय के माध्यम से शासन को डॉक्टरों की कमी को लेकर लगातार अवगत कराया जा रहा है। इसके लिए पत्राचार किया जा रहा है। मगर अभी तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। डॉक्टरों की कमी से अस्पताल के संचालन में दिक्कतें पेश आ रही हैं।
डा. एनएस तोमर, सीएमएस, एसपीएस राजकीय चिकित्सालय, ऋषिकेश
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