कौशल सिखौला
हरिद्वार।
राज्य से पलायन रोकने के लिए बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ ने योजना बनाई है। बंजर भूमि पर नींबू, मिर्च और जड़ी बूटियां उगाकर रामदेव पहाड़ों की सूरत बदलने जा रहे हैं। रामदेव और उनके साथी बालकृष्ण पलायन पर स्थायी रोक लगाने के लिए पहाड़ों के सभी जिलों में पहुंच रहे हैं। नीबू, मिर्च, आडू, खुमानी आदि के माध्यम से गांव-गांव की तकदीर बदलकर सफेद चंदन की खेती बड़े पैमाने पर शुरू की जा रही है। बाबा रामदेव हरिद्वार और कई मैदानी राज्य में अब तक अनेक उद्योग स्थापित कर करीब 800 प्रॉड्क्ट बाजार में उतार चुके हैं। ये सभी आयुर्वेदिक उत्पादन हैं और हर्बल के क्षेत्र में बड़ा काम शुरू किया गया है। इसी वर्ष बाबा की जींस बाजार में आने वाले हैं। इसका निर्माण के लिए नागपुर में लगाई फैक्ट्री में काम चल रहा है। बाबा की मान्यता है कि उत्तराखंड की गरीबी मिटाने का एकमात्र साधन पहाड़ों में उद्योग खड़े करना है। राज्य से पलायन रोकने के लिए पतंजलि योगपीठ ने जना बनाई है। आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि इसके लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गांव बड़ी पोखरी से शुरुआत की जा चुुकी है। बड़े पैमाने पर पर्वतीय युवाओं को नींबू और हरी मिर्च की खेती के काम में लगाया गया है। इस कच्चे माल के लिए निर्माण इकाई भी वहीं तैयार की जा रही है। साथ ही कई पहाड़ी गांव में आडू, खुमानी, प्लंब और सफेद चंदन उगाने का काम युवाओं के माध्यम से शुरू कर दिया गया है। हजारों युवाओं को पतंजलि पहाड़ों में ही रोजगार देगी ताकि वे पहाड़ छोड़कर मैदानों में न जाएं। आचार्य ने बताया बड़ी पोखरी में तीन किलोमीटर नीचे से पानी ऊपर चढ़ाया गया है। खेती और जड़ी बूटी आधारित ऐसे उद्योग लगाने के काम दर्जनों स्थानों पर शुरू हो चुका है। अब उत्तराखंड की जवानी वहीं रोकी जाएगी। साथ आधुनिक मशीनों से दूर-दराज के गांव में पानी पहुंचाकर निर्जन होते गांव की शक्ति बाहर नहीं जाने दी जाएगी।
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि कपड़ों की लांचिंग के साथ अन्य क्षेत्रों में भी प्रवेश होने वाला है। विश्व स्तरीय गुजरात के अमूल उत्पादन को हरा चारा भी पतंजलि उपलब्ध करा रहा है। खेतों में बाजरा और मक्का की खेती कराई जा रही है। इसी प्रकार बायोखाद के क्षेत्र में भी पतंजलि प्रवेश कर चुकी है। फिलहाल इस वित्तीय वर्ष में तीस करोड़ की बायो खाद किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आचार्य ने बताया कि देशी उद्योग ही नहीं जमीनी पदार्थ भी तैयार करना पतंजलि का मकसद है। वह दिन दूर नहीं जब स्वदेशी के माध्यम से देश की तकदीर बदल जाएगी।