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बुधवार की शाम गंगा तटीय क्षेत्र में ठंडी हवाएं

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
बुधवार शाम हरिद्वार के गंगा तटों पर चली ठंडी हवाओं से नगरीय क्षेत्र में भारी ठंड शुरू हो गई है। हवाएं इतनी तेज थी कि हरकी पैडी पर होने वाली सायंकालीन आरती में भी काफी कम श्रद्धालु पहुंचे। तटीय क्षेत्रों में तापमान गिरने से गंगा के मैदानों और घाटों पर सायंकाल सन्नाटा पसरा रहा। अधिक ठंड लाने वाली हेमंत ऋतु बृहस्पतिवार से शुरू हो जाएगी।
शरद ऋतु आने पर गंगा किनारे के क्षेत्रों में सायंकाल ठंड बढ़ जाती है। बुधवार को एकाएक सायं चार बजे से बहुत तेज ठंडी हवाएं चलने से यात्रियों और स्थानीय लोगों की संख्या भी घटती चली गई। दिन ढलने से पहले ही गंगा के उस पार मैदान खाली-खाली नजर आने लगे। यही हाल नीलधारा और गंगा नहर के किनारों का था। पटरी मार्ग पर भ्रमण वाले बुजुर्गों ने एक सप्ताह से शाम के समय भ्रमण में जाना कम कर दिया है। शरद ऋतु में हरिद्वार का तापमान तटीय क्षेत्रों में कम होता आया है। बुधवार को तो बहुत तेज ठंडी हवाओं से नगर में भी ठंड बढ़ गई। इसका गंगा के तटीय क्षेत्रों में व्यापारियों के कारोबार पर भी असर पड़ेगा।
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कार्तिक मास में प्रतिवर्ष भागवत कथाएं खूब होती है। इस बार इन कथाओं में कमी आई है। कृष्ण पक्ष की पितृनिमित्त भागवत गिनती की हुई। अलबत्ता शुल्क पक्ष में धार्मिक आयोजन बढ़ने के आसार हैं। शुक्ल पक्ष में लक्ष्मी नारायण को प्रसन्न करने के लिए देव कथाओं का आयोजन किया जाता है। बृहस्पतिवार 16 नवंबर को भगवान सूर्य वृश्चिक में प्रवेश कर रहे हैं। प्रवेश का पुण्य काल दिन भर बना रहेगा। सूर्य के वृश्चिक में आने से ऋतु परिवर्तन होता है। 16 नवंबर से सूर्य का तापमान और अधिक गिरता जाएगा। दक्षिणायन यात्रा से सूर्य की ऊर्जा दक्षिण दिशा पर खर्च होती है। परिणाम स्वरूप और भी अधिक ठंडे दिन आने वाले हैं। इस बार कार्तिक मास में पूरे महीने स्नान करने के लिए आए श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम है। हेमंत ऋतु में और अधिक ठंडी हवाएं गंगा के के तट पर चलने लगेगी। सायंकालीन गंगा आरती में भी यात्रियों की भीड़ अब कम होती जाएगी।
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बिल्वकेश्वर में शिव महापुराण कथा आज से
हरिद्वार। शिव को पाने के लिए पार्वती ने जिस गौरीकुंड और बिल्वकेश्वर पर तप किया था, वहां आज तक कभी भी शिव महापुराण की कथा नहीं हुई। अब पहली बार बृहस्पतिवार से 26 नवंबर तक 11 दिवसीय शिव कथा आयोजित की गई है। महंत विश्वंबर वन ने बताया कि कथा की ज्ञान गंगा पौराणिक पंड़ित रामजी पांडे के सानिध्य में बहाई जाएगी। बृहस्पतिवार शाम बिरला घाट से बिल्वकेश्वर मंदिर और गौरी घाट तक भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया।
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