अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कनखल स्थित दादूबाग आश्रम में देववाणी परोपकार मिशन की ओर से आयोजित 5वें सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। आज आवश्यकता है कि संस्कृत को कर्मकांड की भाषा के साथ-साथ आमजन की भाषा के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, लेकिन बिना जनसहयोग यह संभव नहीं।
मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि 2001 की जनगणना के अनुसार हमारे देश में केवल 14,135 लोग ही ऐसे पाए गए जो धाराप्रवाह रूप से संस्कृत भाषा बोल सकते हैं, यह आंकड़ा बहुत ही निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, अपितु हमारी संस्कृति की पहचान भी है। आज आवश्यकता है कि संस्कृत एवं संस्कृति के उत्थान के लिए प्रत्येक व्यक्ति योगदान दे। उन्होंने कहा कि प्राचीनकाल में भारत को विश्वगुरु बनाने में संस्कृत का अहम योगदान रहा है। कार्यक्रम में प्रकाश पंत के साथ ही दक्षिण काली के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में विजेताओं को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम संयोजक ईश्वर सुयाल ने बताया कि प्रतियोगिता में अंजली शर्मा प्रथम, प्रकाश तिवारी द्वितीय, हिमानी तृतीय एवं राकेश गौड़ चतुर्थ रहे। इस अवसर पर संजय चतुर्वेदी, बृजेश बनकोठी, पवन चौधरी, एसएल गुप्ता, शक्ति त्यागी, देवेंद्र प्रधान, पार्षद कन्हैया खेवड़िया भी उपस्थित थे।