अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
श्री गीताकुटीर तपोवन में सदगुरुदेव स्वामी गीतानंद महाराज की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास किरीट भाई ने निष्काम भक्ति के सूत्र देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भक्त ध्रुव, प्रह्लाद, शबरी द्रौपदी जैसे पात्रों की कथाओं का संग्रह है। जो हमें भगवान के प्रति विश्वास रखते हुए निष्काम भक्ति का संदेश देती है। कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत्र ने भी कथा का अमृत पान किया।
कथा व्यास ने छठे दिन की कथा में श्रोताओं को गोपी गीत और महारास के प्रसंग को श्रवण कराते हुए कहा कि गोपी गीत श्रीमद्भागवत कथा का हृदय है। जो जीव रूपी गोपी के प्रभु से मिलने की प्रसन्नता और उनसे बिछड़ने की विरह वेदना को व्यक्त करता है। जीव रूपी गोपी को जब प्रभु के मिलने का अभिमान हो जाता है। तब प्रभु जीव आत्मा को अभिमान रहित भक्ति करने का ज्ञान देते हुए अंर्तध्यान होकर यह संदेश देते हैं कि संसार मिथ्या है, ब्रह्म सत्य है। उन्होंने रुकमणी विवाह के प्रसंग को श्रवण कराते हुए कहा कि रुकमणि का अनन्य विश्वास और समर्पण ही प्रभु से मिलने का कारण बना। भक्त की भक्ति और उसका समर्पण ही परमात्मा को अपने वश में करता है। कथा में पहुंचे कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने संतजनों से आशीर्वाद लेकर व्यास पीठ को प्रणाम किया। दक्षिण काली मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी भी श्रद्धालु भक्तजनों को आशीर्वाद देने कथा पंडाल में पहुंचे। स्वामी अवधेशानंद, शिवदास दुबे, एचके वाधवा, केके मित्तल, पार्षद अनिल मिश्रा आदि ने अतिथीयों तथा संतों का स्वागत किया।
भवसागर की वैतरणी है श्रीमद् भागवत
हरिद्वार। राजा गार्डन जगजीतपुर में हनुमान चौक स्थित हनुमान मंदिर गोशाला में आयोजित कथा में श्री गीता विज्ञान आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत भवसागर की वैतरणी है। जिसमें भगवान के अवतार एवं उनके चरित्र का श्रवण कर व्यक्ति धर्म के अनुरूप कर्म करने की प्रेरणा प्राप्त करता है। नैतिक पतन के इस युग में धार्मिक आयोजनों के माध्यम से ही समाज को विसंगतियों से मुक्त रखा जा सकता है।
हनुमान मंदिर में 23 से 30 नवंबर तक आयोजित हो रहे श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पाश्चात्य एवं आधुनिक प्रचार माध्यमों में व्यक्ति की विचारधारा बदलने का कुत्सित प्रयास चल रहा है। मोबाइल तथा नेट पर जो अश्लीलता परोसी जा रही है, उससे हमारी भावी और वर्तमान दोनों पीढ़ियां बर्बाद हो रही हैं। परिणाम स्वरूप जो रिश्ते कलंकित हो रहे हैं वे विदेशी संचार माध्यमों द्वारा हमारी संस्कृति को समाप्त करने का प्रयास हैं। धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के लिए ही 22 नवंबर को पूर्वाह्न 10 से 12 बजे तक कलश यात्रा तथा 23 से 30 नवंबर तक प्रतिदिन 2 से सायं 5 बजे तक भागवत कथा का आयोजन होगा। जिसकी पूर्णाहुति 30 नवंबर को विशाल भंडारे के साथ की जाएगी।