गौचर। गौचर नगरी में मंगलवार (आज) से 67वां राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला शुरू होगा, जिसमें लगातार सात दिनों तक उत्तराखंड की संस्कृति जीवंत रहेगी। प्रात: रावल देवता की पूजन के बाद शुरू होने वाले लोक संस्कृति के इस मेले का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत करेंगे।
एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक गौचर मेले की परिपाटी चली आ रही है। चमोली और पिथौरागढ़ दो जिलों की भोटिया जनजाति की पहल पर शुरू हुआ यह मेला पहले क्षेत्र के लोगों की रोजमर्रा की वस्तुओं के व्यापार का केंद्र था। धीरे-धीरे मेला संस्कृति लोक कला और आधुनिकता के सूत्र में बंध गया। नीति, माणा घाटी के प्रबुद्ध जनप्रतिनिधि स्व. बाल सिंह पाल, पान सिंह बंपाल, गोविंद सिंह राणा, प्रतिष्ठित पत्रकार एवं समाजसेवी स्व. गोविंद प्रसाद नौटियाल और गढ़वाल के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर आडी वर्नीडी ने वर्ष 1943 में इस मेेले को आकर्षक बनाने की नींव रखी थीं। गढ़वाल के पंवार राजा की धरोहर रही गौचर नगरी में होने वाले इस ऐतिहासिक मेले में इस बार स्कूली बच्चों, जागर सम्राट प्रीतम भरतवाड़, गीत नाटक प्रभाग केंद्र सरकार, कुमाऊं के लोक गायक ललित मोहन जोशी, जागर गायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट, सूचना विभाग उत्तराखंड, स्थानीय और क्षेत्रीय सांस्कृतिक टीमों की सांस्कृतिक टीमों के अलावा विभागीय गोष्ठियों, प्रदर्शनी तथा खेल तमाशे मेले में होंगे।