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स्वामीराम ने जनसेवा को समर्पित किया था पूरा जीवन

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स्वामीराम का महासमाधि वार्षिक समारोह आज
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-- मुख्यमंत्री करेंगे शिरकत, गुजरात की संस्था को देंगे स्वामी राम मानवता पुरस्कार

अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला। एचआईएचटी के संस्थापक डा. स्वामीराम का 21वां महासमाधि दिवस समारोह आज भव्य रूप में मनाया जाएगा। समारोह में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जबकि विशिष्ट अतिथि पूर्व सीएम और सांसद डा. रमेश पोखरियाल निशंक, उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत होंगे। कुलपति डा. विजय धस्माना ने बताया कि समारोह के दौरान नवनिर्मित रेफरेंस लैब और औपचारिक उद्घाटन और शौर्य दीवार का लोकार्पण किया जाएगा। इसी कड़ी में स्वामी राम मानवता पुरस्कार गुजरात की सामाजिक संस्था सेवा रूरल को दिया जाएगा। इस दौरान बेस्ट इंप्लाई अवार्ड और छात्रवृत्ति भी वितरित की जाएगी। शाम को एक शाम कान्हा के नाम भजन संध्या का आयोजन भी होगा।
साल 1925 में पौडी जनपद के तोली गांव में डा. स्वामीराम का जन्म हुआ। किशोरावस्था में ही स्वामीराम ने सन्यास की दीक्षा ली। 13 वर्ष की अल्पायु में ही विभिन्न धार्मिक स्थलों और मठों में हिंदु और बौद्ध धर्म की शिक्षा देना शुरू किया। 24 वर्ष की आयु में वह प्रयाग, वाराणसी और लंदन से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद कारवीर पीठ के शंकराचार्य पद को सुशोभित किया। गुरु के आदेश पर पश्चिम सभ्यता को योग और ध्यान का मंत्र देने के लिए 1969 में अमेरिका पहुंचे। 1970 में अमेरिका में कुछ ऐसे परीक्षणों में भाग लिया जिनसे शरीर और मन से संबधित चिकित्सा विज्ञान के सिद्धांतों को मान्यता मिली।
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उनके शोध को 1973 में इन्साईक्लोपीडिया ब्रिटेनिका ईयर बुक आफ सांइस और नेचर सांइस एनुअल और 1974 में वर्ल्ड बुक सांइस एनुअल में प्रकाशित किया गया। स्वास्थ्य सेवाओं से महरूम उत्तराखंड में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य संस्थान बनाने का स्वप्न देखा और इसको आकार देने के लिए 1989 में हिमालयन इंस्टीट्यूट की स्थापना की। ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए 1990 में रूरल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट बनाया। 1994 में हिमालयन अस्पताल की स्थापना की। प्रदेश में चिकित्सकों की कमी को देखते हुए मेडिकल कॉलेज बनाया। नवंबर 1996 में स्वामीराम ब्रहमलीन हो गए। इसके बाद उनके सपनों को पूरा करने का जिम्मा एसआरएचयू के कुलपति डा. विजय धस्माना ने उठाते हुए संस्थान को बड़ा रूप दिया।
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