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केंद्र में अटकी यूआईडीएसएसएमटी के तहत पेयजल योजना
-- जल निगम ने 2014 में बनाया था 80.25 करोड़ का प्रस्ताव, एक लाख आबादी को मिलना था लाभ
हेमवती नंदन भट्ट
ऋषिकेश।
डबल इंजन की सरकार में तीर्थनगरी की पेयजल पुनर्गठन योजना अटक गई है। यूआईडीएसएसएमटी (अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम फॉर स्माल एंड मीडियम टाउंस) के तहत प्रस्तावित पेयजल योजना से शहर के हजारों लोगों के साथ ही यहां देश-दुनिया से आने वाले लाखों सैलानियों को लाभ मिलना था, लेकिन 80.25 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना करीब साढ़े तीन साल से लंबित पड़ी है, जिसे केंद्र सरकार मंजूरी नहीं दे रही है। जल निगम मुनिकीरेती डिवीजन की ओर से ऋषिकेश नगर क्षेत्र की पेयजल किल्लत के मद्देनजर पेयजल पुनर्गठन योजना तैयार की गई थी। यूआईडीएसएसएमटी के अंतर्गत स्कीम के तहत शहर के सभी 20 वॉर्डों के लगभग एक लाख की आबादी को सीधे तौर पर लाभ मिलना था, साथ ही वर्ष भर तीर्थनगरी में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होना था। वहीं कुंभ व कांवड़ मेलों के समय श्रद्धालुओं को होने वाली पानी संबंधी दिक्कतों से निजात मिलनी थी।
विभाग द्वारा फरवरी-2014 में भारत सरकार को योजना का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भेजी थी, जिसे नवंबर-2017 तक भी मंजूरी नहीं मिल पाई है। योजना के तहत गंगातटीय क्षेत्रों में पांच इंटेकवेल आई वैल के अलावा शहर के विभिन्न हिस्सों में 158 किलोमीटर वाटर सप्लाई लाइन बिछाने के साथ ही 12 ट्यूबवेल स्थापित किए जाने थे। पेयजल स्टोरेज के लिए 8 नए ओवरहेड टैंकों के निर्माण का प्रावधान किया गया था, जबकि दो पुराने ओवरहेड टैंक योजना के तहत उपयोग में लाए जाने थे।
शहर के कई इलाकों में अक्सर पेयजल संकट बना रहता है। जबकि कई इलाकों में वर्षों पुरानी पेयजल लाइनों के चलते दूषित पानी की शिकायतें आम हैं। क्षेत्र में पेयजल दिक्कतों से जूझने वाले इलाकों में मायाकुंड, चंद्रेश्वरनगर, सर्वहारानगर, बनखंडी, गोविंदनगर, कुम्हारबाड़ा, आदर्शग्राम, गंगानगर, सोमेश्वरनगर, आवास विकास कॉलोनी, वीरभद्र मार्ग, भैरव कॉलोनी आदि इलाके प्रमुखरूप से शामिल हैं।
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यूआईडीएसएसएमटी स्कीम के तहत 2014 में वाटर सप्लाई स्कीम तैयार की गई थी, जिसके सर्वे व डीपीआर तैयार करने में विभागीय टीम को चार महीने का समय लगा था। प्रस्तावित पेयजल योजना से शहर की अगले 30 साल की स्थायी आबादी के साथ ही अस्थायी आबादी को भी लाभ मिलना था। योजना फिलहाल भारत सरकार में लंबित है, इस बाबत नगर पालिका समेत विभिन्न माध्यमों से कई पत्र भी केंद्र को भेजे जा चुके हैं, मगर फिलहाल सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी है। मंजूरी मिलने पर योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा।
-- आरके सिंह, सहायक अभियंता, जल निगम मुनिकीरेती डिवीजन।