कर्णप्रयाग। जिले में परंपरागत काष्ठ शिल्प का काम करने वाले शिल्पियों को अब नई पहचान मिल सकेगी। जिला उद्योग विभाग ने काष्ठ शिल्प को बढ़ावा देने की कवायद शुरू की है। इसके तहत ब्लाक के बैनोली और नौटी गांव में 60 शिल्पियों को टूल किट वितरित कर योजना शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि शिल्प को बाजार मांग के हिसाब से तैयार किया जाएगा, जिससे इस पुरातन कला को स्थान मिलने के साथ ही शिल्पियों को रोजगार भी मिल सकेगा।
उद्योग विभाग के सहायक प्रबंधक बीपी सती ने बताया कि योजनानुसार विभाग लुप्त होते परंपरागत काष्ठ (हस्त) शिल्प को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गांवों में शिल्पियों को चिह्नित कर प्रशिक्षण दे रहा है। इसके बाद गांव में ही समिति बनाकर सामान को तैयार करने, कच्चा माल खरीदने के अलावा बेचने की व्यवस्था भी कर रहा है। ऐसे में प्रदेश के गांवों में लुप्त हो रहे शिल्प को जहां बाजार मिलेगा, वहीं इससे जुड़े लोगों को स्वरोजगार भी मिलेगा। विभाग के महाप्रबंधक डा. एमएस सजवाण ने बताया कि जिले के कर्णप्रयाग और जोशीमठ ब्लाकों में इस योजना को शुरू करने के लिए चिह्नित किया गया है। अन्य चिह्नित गांवों के शिल्पियों को भी जल्द किट दिया जाएगा।
बैनोली के शिल्पियों को काष्ठ शिल्प में है महारथ
नौटी के भुवन नौटियाल का कहना है कि क्षेत्र के बैनोली के शिल्पियों को कभी काष्ठ शिल्प में महारथ हासिल थी। गुलामी के दौर और सत्तर के दशक तक यहां शिल्पी चमोली ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में जाकर नक्काशी का काम करते थे, लेकिन बाजार में प्रचलन खत्म होने से शिल्पकला भी गुम हो गई। ऐसे में उद्योग विभाग परंपरागत शिल्प को बढ़ावा देता है तो इसे फिर बाजार और नया मुकाम हासिल हो सकेगा।
ये उत्पाद होंगे तैयार
टूल किट में शिल्पियों को आरी, रंदा, छेनी, रेती सहित अन्य उपकरण दिए गए हैं, जिससे शिल्पी नक्काशी युक्त फूलदान, देवी देवताओं की मूर्तियां सहित घरों में प्रयोग होने वाले सामान तैयार करेंगे। इन सामानों को समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुुंचाया जाएगा।