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भगवान हरि का वांग्मय स्वरुप है श्रीमद्भागवत की कथा-जगद्गुरु

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान हरि का साक्षात स्वरूप है। इस कथा के श्रवण करना परम कल्याणकारी है। भागवत और गीता हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। पूरे विश्व में इन ग्रंथों का मुकाबला किसी भी अन्य ग्रंथ से नहीं किया जा सकता।
जगद्गुरु हंसदेवाचार्य बुधवार को यहां गीता कुटीर तपोवन में प्रख्यात कथावक्ता किरीट भाई की और से कथा शुभांरभ पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीहरि अनंत हैं और उनकी कथा भी अनंत है। वैष्णव परंपरा समूचे संसार को ज्ञान का मार्ग प्रदान करती है। यह कथा मानव मात्र को कल्याण का रास्ता भी दिखाती है। भागवत एक ऐसा ग्रंथ है जो मृत्यु के भय से मुक्त कराता है। महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज ने कहा कि गीता कुटीर तपोवन की स्थापना परम गीताविद् स्वामी गीतानंद भिक्षु की ओर से की गई थी। गंगा के तट पर स्थित यह आश्रम ज्ञान का संदेश देता आ रहा है। भागवत कथा के साथ आध्यात्म से जुड़े अनेक मुद्दों पर भी प्रकाश डाला जाएगा। शुभारंभ के अवसर पर मुमुक्ष मंडल के स्वामी सदगुरु, स्वामी शाश्वत, स्वामी प्रज्ञा, स्वामी सनातन, स्वामी मुक्तानंद आदि उपस्थित थे।
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कथा व्यास गुजरात से आए किरीट भाई ने मां गंगा का वर्णन करते हुए कहा कि गंगा तट पर कथा श्रवण से मुक्ति निश्चित है। शुकदेव मुनि और राजा परीक्षित के प्रसंग का स्मरण कराते हुए उन्होंने भागवत के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। विधिवत कथा शुभारंभ बृहस्पतिवार से होगा। अनेक संत प्रतिदिन कथा में भाग लेंगे।
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