जोशीमठ। ब्लॉक के बड़ागांव, सलूड़ और पैनी गांवों में कई भेड़-बकरियां निमोनिया से मर चुकी हैं, जबकि कई भेड़-बकरियां इसकी चपेट में हैं। हालांकि पशुपालन विभाग में डॉक्टरों की टीम गांव में भेज दी है लेकिन भेड़-बकरियों की संख्या अधिक होने के कारण सभी का उपचार सही से नहीं हो पा रहा है। काश्तकारों में गांव में अतिरिक्त डॉक्टर भेजने और बीमारी की रोकथाम की मांग की।
बड़ागांव निवासी विक्रम सिंह, मातबर सिंह, वीरेंद्र सिंह और उत्तम सिंह का कहना है कि क्षेत्र में भेड़ बकरी पालन ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय है। इन दिनों बीमारी से बड़ी संख्या में भेड़-बकरियां मर रही हैं। बीमारी की रोकथाम के लिए पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध न होने से यह सिलसिला थम नहीं पा रहा है। वहीं पशुपालन विभाग के डॉक्टर डा. रविंद्र सिंह राणा का कहना है कि पशुपालकों ने समय से भेड़ बकरियों में होने वाले पीपीआर निमोनिया का टीकाकरण नहीं करवाया, जिससे यह स्थिति पैदा हुई है। गांवों में भेड़-बकरियों के उपचार के टीमें भेजी गई है। साथ ही ग्रामीणों को दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। शीघ्र स्थिति पर काबू पा लिया जाएगा।