गोपेश्वर। चमोली जिले में ऋषिकुंड-सजधार ट्रैक सैलानियों की पसंद में शामिल होता जा रहा है। ट्रैक पर अभी भी सैलानियों के 18 ग्रुप सैर-सपाटे पर पहुंचे हुए हैं। इस वर्ष अभी तक करीब 400 सैलानी इस ट्रैक पर ट्रैकिंग कर चुके हैं।
समुद्र तल से 4240 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ऋषिकुंड-सजधार ट्रैक पर इस वर्ष सैलानियों की आवाजाही बढ़ी है। अभी तक सैलानी औली-क्वांरीपास ट्रैक के सैर-सपाटे पर ही पहुंचते थे, लेकिन स्थानीय टूर ऑपरेटरों ने सैलानियों को ऋषिकुंड-सजधार ट्रैक पर ट्रैकिंग करने के लिए प्रेरित किया। जोशीमठ में मेरीगोल्ड टूर के प्रवक्ता संजय कुंवर ने बताया कि 17 सालों से वे सैलानियों को टूर करवा रहे हैं। औली-क्वांरीपास ट्रैक पर प्रतिवर्ष पर्यटकों का दबाव रहता है। लिहाजा पर्यटकों को ऋषिकुंड-सजधार ट्रैक के सैर-सपाटे पर भेजा जा रहा है। अब पर्यटकों को यह ट्रैक खूब भा रहा है। हाई हिमालयन एडवेंचर जोशीमठ के मालिक महावीर राणा ने बताया कि उनकी टीम के साथ सैलानियों के ग्यारह ग्रुप ऋषिकुंड-सजधार ट्रैक पर ट्रैकिंग के लिए जा चुके हैं। जिला पर्यटन अधिकारी एसएस यादव का कहना है कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद से ऋषिकुंड ट्रैक पर सैलानियों का यहां पहुंचना कम हो गया था, लेकिन अब फिर ट्रैक सैलानियों से गुलजार हो गया है।
ऋषिकुंड ट्रैक से दिखती है ऊर्जा-त्रिजा पीक
गोपेश्वर। ऋषिकुंड-सजधार ट्रैक से तिब्बत और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित ऊर्जा-त्रिजा पीक भी दिखाई देती है। ट्रैक के शीर्ष भाग से नंदा पीक के साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग भी दिखाई देता है।
कैसे पहुंचे
जोशीमठ-मलारी हाईवे पर 30 किलोमीटर की दूरी वाहन से जाने के बाद सुराईथोटा गांव से ट्रैक की शुरुआत होती है। ट्रैक पर भलगांव होते हुए 32 किलोमीटर की दूरी तय करती पड़ती है। यह ट्रैक चार दिनों तक का है।