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तीर्थनगरी छह महापर्व का हुआ आगाज

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चतुर्थी नहाय खाय के साथ छठ पूजा शुरू
-- तीर्थनगरी में उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा गुजरात, झारखंड आदि क्षेत्रों से भी श्रद्धालु जुटे

अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेेश। तीर्थनगरी व समीपवर्ती क्षेत्रों में आस्था, श्रद्धा, समर्पण और सेवा भाव का महापर्व छठ पूजन कार्यक्रम मंगलवार को चतुर्थी नहाय खाय के साथ ही विधिवत शुरू हो गया। छठ पूजा को लेकर पूर्वांचल मूल के श्रद्घालुओं की गंगा स्नान के लिए नदीतटों, घाटों पर तड़के से ही भीड़भाड़ जुटनी शुरू हो गई थी। इस दौरान उन्होंने मोक्षदायिनी में डुबकी लगाई। साथ ही दोपहर के समय पर्व की खरीदारी के लिए भी बाजार में खासी रौनक दिखी।
चार दिवसीय छठ महापर्व को लेकर मंगलवार सुबह त्रिवेणीघाट समेत मुनिकीरेती, लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, तपोवन, बैैराज, श्यामपुर, रायवाला आदि क्षेत्रों में गंगाघाटों व तटों पर उत्तर प्रदेश और बिहार मूल के स्थानीय श्रद्धालु स्नान के लिए जुटे। इस दौरान उन्होंने मोक्षदायिनी में डुबकी लगाई। इसके अलावा गुजरात, झारखंड आदि क्षेत्रों से भी श्रद्धालु छठ पर्व मनाने के लिए तीर्थनगरी में जुटे।
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वहीं, शहर के बाजार में छठ मइया की पूजा के लिए लोगों ने जमकर खरीदारी की। उन्होंने डाला, सूप, वस्त्र, पूजन सामग्री की खरीदारी की, साथ ही काफी संख्या में लोगों ने पर्व के लिए गन्ना, सकरकंदी, सिंगारा, आंवला, अदरक, कच्ची हल्दी, संतरा, केला, सेव, नासपाती, पपीता, अनानास आदि विभिन्न प्रकार के फलों व सब्जियों की खरीदारी भी की। देर शाम श्रद्धालुओं ने घरों में छठ मइया की विधिवत पूजा अर्चना की। साथ ही फलारी नमक से चने की दाल व लौकी की सब्जी तैयार कर सादा भोजन किया। रात्रि के समय छठ माता के डाला में चढ़ाने वाला प्रसाद ठेकुवा तैयार किया गया।
आज होगा खरना
बुधवार को पंचमी खरना के दिन श्रद्धालु उपवास रखेंगे। शाम को छठ मइया को गुड़ वाली खीर और रोटी से बना प्रसाद का भोग लगाया जाएगा। मौसमी फल छठी मां को अर्पित किए जाएंगे। गुड़ वाली खीर और रोटी के प्रसाद से महिलाएं व्रत का परायण करेंगी।
बृहस्पतिवार को पहला संध्या अर्घ्य
खरना व्रत के परायण के बाद श्रद्धालुओं का करीब 36 घंटे का निर्जल उपवास रखेंगी। बृहस्पतिवार को डाला सजाकर सूर्यदेव की आराधना के लिए दोपहर बाद श्रद्धालु गंगातटों की ओर रुख करेंगे। इसके बाद सांय काल करीब साढ़े पांच बजे पूजा-अर्चना के बाद डूबते सूर्य भगवान को अर्घ्य देंगे।
शुक्रवार को होगा दूसरा प्रात: अर्घ्य
शुक्रवार को सूर्योदय पर व्रती महिलाएं व पुरुष गंगाघाटों पर जुटेंगे और तड़के करीब साढ़े छह बजे उगते सूर्यदेव को अर्घ्य देंगे। इसके बाद अपने घरों को लौटकर छठ व्रत का परायण करेंगे। अर्घ्य देने के बाद महिलाएं कच्चे दूध का शरबत ग्रहण करेंगी।
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मनोकामना पूर्ण होने पर करेंगे कष्टकारी यात्रा
छठ पर्व पर जिन लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं उनमें से कई लोग बृहस्पतिवार को डूबते सूर्य भगवान व शुक्रवार को उगते सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए घर से गंगा तट तक जमीन पर रेंग रेंगकर कष्टकारी यात्रा करेंगे।
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