अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
स्टोन क्रशर की सील खोलने के आदेश जारी करने के पीछे बड़ा खेल होने का आरोप लगाते हुए मातृसदन के संतों ने एक बार फिर आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। संस्था के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने इसके खिलाफ 30 अक्तूबर से अनशन (तपस्या) शुरू करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्टोन क्रशर खोलने के आदेश देकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आदेशों की अवहेलना की है। इसके विरोध में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना और पर्यावरण संरक्षण एक्ट के तहत केस दर्ज कराया जाएगा।
शनिवार को पत्रकार वार्ता में मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि वर्ष 2011 में हाईकोर्ट ने गंगा के पांच किलोमीटर दायरे में स्टोन क्रशर हटाने का आदेश जारी किया था। उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश यथावत रखने का निर्णय सुनाया था। जिसके बाद हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी ने शासन को खनन और स्टोन क्रशर हटाने का अनुमोदन किया था, लेकिन सरकार ने उस पर कोई निर्णय नहीं लिया। मामला सीपीसीबी कोर्ट में पहुंचा और छह दिसंबर वर्ष 2016 को कोर्ट ने गंगा के पांच किलोमीटर दायरे से क्रशर हटाने का आदेश जारी कर खनन सचिव को निर्देशित कर दिया, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मातृसदन कई बड़े अधिकारियों पर कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज कराया। फेरूपुर के किसान पवन कुमार सैनी ने भी सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में वाद दायर किया था। उसमें बताया था कि खनन के लिए उनकी खेती करने वाली भूमि को नष्ट किया गया था। इसी वर्ष तीन मई को हाईकोर्ट ने स्टोन क्रशर पर सील लगाने के आदेश जारी कर दिया, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने 24 अगस्त को आदेश जारी किया था कि 24 घंटे के भीतर स्टोन क्रशर सील किए जाएं। जिस पर 45 स्टोन क्रशर सील किए गए थे। अब सरकार ने पवन कुमार सैनी द्वारा दायर वाद में कहा है कि उनको सुनवाई का मौका नहीं दिया गया है। जिस पर हाईकोर्ट ने केस को दोबारा सुनने के आदेश किए थे। इस आदेश की आड़ लेकर आदेश 17 अक्तूबर को शासन ने क्रशरों से सील हटाने के आदेश जारी कर दिए।
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि हाईकोर्ट ने सीपीसीबी के आदेशों को यथावत रखा है। इसलिए किसी भी स्टोन क्रशर से सील नहीं हट सकती है। उन्होंने कहा कि शासन ने सीपीसीबी के आदेशों की अवहेलना की है। कोर्ट की अवहेलना पर पूर्व खनन सचिव शैलेश बगौली, प्रमुख सचिव औद्योगिक आनंदवर्द्धन और पूर्व जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ तथा जिलाधिकारी दीपक रावत के खिलाफ सीपीसीबी के आदेशों की अवहेलना का वाद दर्ज कराया जाएगा। इसके साथ ही चारों के खिलाफ पर्यावरण एक्ट में भी केस दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। साथ ही क्रशर की सील खोलने वाले आदेश के खिलाफ मातृसदन का अनशन (तपस्या) 30 अक्तूबर से शुरू होगी। हालांकि अभी यह नहीं बताया गया है कि अनशन (तपस्या) पर स्वामी शिवानंद स्वयं बैठेंगे या फिर कोई अन्य संत। उन्होंने कहा कि सरकार ने खनन खोलने के आदेश जारी किए तो मातृसदन का उग्र आंदोलन शुरू हो जाएगा।
पांच से सात साल की सजा
स्वामी शिवानंद ने बताया कि पर्यावरण एक्ट में दोषी पाए जाने पर पांच से सात साल की सजा का प्रावधान है। स्वामी ने चारों अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कराने की तैयारी कर ली है। सजा के साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी वसूलने का भी प्रावधान है।
मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया है कि डेढ़ करोड़ रुपये देकर सील को खोलने के आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हरिद्वार के एक नेता ने पूरी डील सेट कराई है और देहरादून बैठे एक नेता ने एक करोड़ रुपये रखे हैं। स्वामी ने इन आरोपों की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग भी की है।