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नगर निगम के वार्ड तो बढ़ा रहे पर बैठेंगे कहां

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम परिसीमन की अधिसूचना के बाद नगर निगम में वार्ड पार्षदों की बढ़कर 40 से 45 तक होने जा रही है। वर्तमान पार्षदों की संख्या 30 है, जिनके बैठने के लिए भी ढंग से व्यवस्था नहीं है। बोर्ड बठक के लिए सभागार भी नहीं है। जिस सभागार में बैठकें होती हैं वह पार्षदों के बैठने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। सदन के अंदर अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए भी जगह नहीं बचती है।
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नए परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या बढ़नी तय है, परंतु उनके बैठने तथा उनके साथ बोर्ड बैठक के लिए सभागार ही नहीं है। 30 पार्षदों की संख्या वाले बोर्ड में जब पिछली कांग्रेस सरकार ने 15 पार्षद मनोनीत किए तब भी उनको सदन में बैठाने की समस्या खड़ी हो गई थी। कुछ मनोनीत पार्षदों को तो निर्वाचित पार्षदों की कुर्सियों के पीछे खड़े होकर ही बैठक में भाग लेना पड़ा था। मेयर मनोज गर्ग ने एक आधुनिक साज-सज्जायुक्त अधिवेशन हॉल के साथ नया बहुउद्देश्य कार्यालय बनवाने का बीडा उठाया था। इसके लिए वह मुख्यमंत्री हरीश रावत तथा तत्कालीन मुख्य सचिव के भिड़ गए थे। स्टेट गेस्ट हाउस के लिए ली गई भूमि के बदले मुआवजा के तौर पर नगर निगम के नए कार्यालय भवन के 5 करोड़ 60 लाख रुपये स्वीकृत भी वह करा चुके थे। लेकिन मेयर की अपनी पार्टी की सरकार बनने के बाद उनके तेवर ठंड़े पड़ गए हैं और 5 करोड़ 60 लाख रुपये की स्वीकृति की फाइल कहां दब कर रह गई है इसका भी उन्हें पता नहीं हैं। अब वर्तमान नगर निगम बोर्ड के कार्यकाल के अंदर नया सभागार तथा कार्यालय भवन निर्माण की संभावना नहीं है। 2018 में चुनाव के बाद गठित होने वाला नया बोर्ड ही इस काम को आगे बढ़ा पाएगा। ऐसी स्थिति में नए मेयर को बोर्ड अधिवेशन आयोजित करने के लिए शहर में किसी होटल, धर्मशाला की तलाश करनी पड़ेगी। हालांकि मेयर मनोज गर्ग 2018 के लिए फिर ताल ठोक चुके हैं। उनका कहना है कि नवगठित बोर्ड की प्राथमिकता नया सभागार तथा बहुउद्देश्य कार्यालय भवन का निर्माण कराना होगा।
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