अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। अन्नकूट महोत्सव परमात्मा के अन्न स्वरूप के पूजन का महापर्व है।
यह बात भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि ने अन्नकूट महोत्सव के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि अन्नकूट महोत्सव प्राणी मात्र को परमात्मा की ओर से प्रदत्त प्राणतत्वों के संरक्षण का संदेश देनेे का माध्यम है। भारत माता मंदिर में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि अन्न जहां जीवनरक्षक है, वहीं इसकी अधिकता जीवन को कष्ट में भी डाल सकती है। इस कारण अन्न का एक नाम यम भी है। उन्होंने कहा कि उत्सवों और आयोजनों में अन्न की बर्बादी चिंता का विषय है तथा परमात्मा स्वरूप अन्न का अपमान है। भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट के मुख्य न्यासी आईडी शर्मा शास्त्री ने कहा कि भारत माता मंदिर में अन्नकूट महोत्सव में 56 प्रकार के व्यंजनों से भगवान श्रीकृष्ण को भोग अर्पित किया जाता है। श्रीमहंत ललितानंद गिरि ने कहा कि द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्द्धन पर्वत की पूजा कर इस पर्व को प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया। अन्नकूट महोत्सव में स्वामी मनीषानंद, स्वामी ब्रह्ममित्रानंद, स्वामी नचिकेता, उदयनारायण पांडेय, विनोद नयन, हरिहर जोशी, नवीन शर्मा, नमन शर्मा सहित गुजरात से आए श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।
दूसरी ओर भूपतवाला स्थित स्वामी दीप्तानंद अवधूत आश्रम में भी गोवर्द्धन पूजा की गई। आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज ने बताया कि गोवर्द्धन पूजा से परिवारों में सुख समृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि गऊ माता की पूजा करने से घर में सुख शांति का वास होता है। महंत साधनानंद महाराज ने कहा कि गोवर्द्धन पूजा से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं। इस अवसर पर स्वामी प्रकाशानंद, स्वामी गोपालानंद, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत शिवम महाराज, महंत मनोजानंद आदि ने गोवर्द्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की और गऊ माता को शक्ति का स्वरूप बताया। स्वामी रामस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि संतों का कार्य समाज में सद्भाव का वातावरण बनाकर सन्मार्ग की प्रेरणा देना होता है। स्वामी रामस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि गोवर्द्धन के दिन गऊ माता की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि का वास होता है।