अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
प्रकाश पर्व दीपावली की सुबह हरकी पैड़ी पर गंगाजी लौट आई है। गंगाजल आने से पवित्र घाटों पर बहती नाला-नालियों की गंदगी भी ढक गई हैं। नमामि गंगे फॉर क्लीन गंगा योजना शुरू हुए जुलाई में एक साल पूरा हो गया है। अब तक इस योजना का गंगा घाटों पर एक भी काम शुरू नहीं हुआ है। एनजीटी के आदेश पर प्रशासन ने गंगाघाटों पर बहती गंदगी को चिह्नित तो कराया, परंतु गंदगी को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया। एनजीटी ने कोर्ट कमिशनर नियुक्त कर जांच भी कराई, परंतु गंगा व गंगाघाटों पर बहती सीवरयुक्त गंदगी में कोई कमी नहीं आई है। नमामि गंगे योजना में गंगाघाटों पर गंगाजी में बहते नालों की गंदगी रोकने के लिए एक स्थान पर परीक्षण के तौर पर बूम लगाया गया था, जो नाले व गंगा के बहाव में बह गया था। गंगाजी की ऊपरी सतह की सफाई के लिए एक ट्रैथ मशीन भी स्थान बदल-बदलकर लगाई जाती रही, परंतु बहती गंगाजी में यह प्रयोग भी सफल नहीं रहा। अब न तो नालों की गंदगी रोकने वाला बूूम दिखाई देता है और ने सतह की सफाई करने वाली मशीन ही नजर आती है। भागीरथी बिंदु से हर की पैड़ी को बहने वाली गंगा नदी की अविरलधारा में मायापुर तक गंदगी राज हो गए हैं।