देवप्रयाग। श्री रघुनाथ कीर्ति राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की ओर संस्कृत महाविद्यालय की भूमि पर किए गए कब्जे के विरोध में महाविद्यालय प्रबंधक कृष्णकांत कोटियाल ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। जबकि संस्थान की ओर से सेवा से हटाए गए पांच संविदा कर्मी भी क्रमिक अनशन पर बैठ गए है।
सोमवार को श्री रघुनाथ कीर्ति राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की ओर से संस्कृत महाविद्यालय की भूमि पर किए जा रहे कब्जे को लेकर महाविद्यालय के प्रबंधक कृष्णकांत कोटियाल आमरण अनशन पर बैठ गए हैै। कोटियाल का कहना है कि संस्थान की ओर से महाविद्यालय की भूमि पर जबरन निर्माण कार्य करवा कर कब्जा किया जा रहा है। कोटियाल ने कहा कि संस्थान की ओर से महाविद्यालय के भवन को छात्रावास के लिए किराए पर लिया गया था, लेकिन विगत चार माह से छात्रावास बगैर किराए व अनुबंध के संचालित किया जा रहा है। संस्थान परिसर में अनशन कर रहे कोटियाल ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि समस्या को लेकर कई बार संस्थान को सूचित किया गया बावजूद इसके संस्थान की ओर से कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। इस मौके पर संस्थान से पांच संविदा कर्मियों को सेवा से हटाए जाने पर उनके की ओर से भी क्रमिक अनशन शुरू किया गया है। संविदा कर्मियों का आरोप है कि बगैर कारण बताए उन्हें सेवा से हटाया गया है। क्रमिक अनशन पर बैठने वालों में अनूप कुमार, रचना कर्नाटक, रेखा केमनी, नवीन सिंह व पल्लवी कोटियाल शामिल थे।