गोपेश्वर। भूकंप के लिहाज से चमोली जिला बेहद संवेदनशील है। ऐसे में यहां भवनों का निर्माण भूकंपरोधी होना अनिवार्य है, लेकिन इस ओर प्रशासन की ओर से कोई गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है।
जिले में करीब 1390 विद्यालय भवन और 33 चिकित्सा भवन हैं। इनमें से करीब 60 फीसदी वर्ष 1999 में आए भूकंप से पहले के निर्मित हैं। जिससे भवनों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है। कई सरकारी भवनों के निर्माण में भी मानकों को ताक पर रखा जा रहा है।
वर्ष 2016 में विश्व बैंक की मदद से सरकार ने यूडीआरपी (उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट) ने जिले के पुराने सरकारी भवनों की रेट्रोफिटिंग की योजना बनाई, लेकिन सरकार की यह योजना जिला मुख्यालय के साथ ही सड़क से लगे विद्यालयों तक सिमट गई। प्राथमिक विद्यालय उर्गम, सैकोट, निजमूला, दशोली, घाट, नंदप्रयाग और पोखरी क्षेत्रों में कई विद्यालय भवन भूकंपरोधी नहीं हैं। बहुुगुणा विचार मंच के संयोजक हरीश पुजारी और पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अवधेष रावत का कहना है कि सरकार को विद्यालय व अस्पताल भवनों का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक से करना चाहिए। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि नव निर्मित विद्यालय व अस्पताल भवनों का निर्माण कार्य रेट्रोफिटिंग तकनीक से किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सरकार भवन जीर्णशीर्ण स्थिति में हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है।