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रजिस्ट्रार कानूनगो संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। उत्तराखंड रजिस्ट्रार कानूनगो संघ के बैनर तले एकत्रित हुए पदाधिकारियों ने तहसीलों में पद सृजित करने के साथ अंग्रेजी शासनकाल के सन 1901 की नियमावली में संशोधन करने की मांग उठायी। उन्होंने तहसीलों में पदों के सृजित न होने और फिलहाल पदों के अनुसार भी कानूनगो न होने पर कार्य की अधिकता से मानसिक उत्पीड़न की समस्या उठायी।
शनिवार को तहसील में कानूनगो कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कानूनगो संघ के प्रांतीय महामंत्री सुशील कुमार सैनी ने कहा कि वेतन विसंगति में सुधार करते हुए ग्रेड पे 4200 स्वीकृत कर दिया गया, लेकिन शासनादेश जारी नहीं किया जा सका है। मैदानी जनपदों में जनसंख्या एवं कृषि क्षेत्रफल की अधिकता के कारण भूमि क्रय विक्रय के फलस्वरूप नामांतरण वाद की अधिकता, ऋण आदेशों की प्रविष्टियां, दैवी आपदा, सूचना का अधिकार, जनगणना, पशुगणना, निर्वाचन कार्य, भू-अभिलेखाकार का रख रखाव, वेतन संबंधी कार्य, भूलेख कंप्यूटरीकरण केंद्र में होने वाले दैनिक कार्य किए जाते हैं। अधिकांश तहसीलों में रजिस्ट्रार कानूनगो का मात्र एक-एक पद ही सृजित है, जिससे रजिस्ट्रार कानूनगो को कार्य की अधिकता के कारण देर रात्रि तक एवं अवकाश के दिनों में भी शासकीय कार्य करना पड़ता है। उन्होंने मांग उठायी कि प्रत्येक तहसील में कम से कम दो पद सृजित किए जाए। तहसील में आउट सोर्सिंग या स्थाई रूप से बस्ता बरदार का एक-एक पद सृजित कर भर्ती किया जाए। भू राजस्व अभिलेखाकार में एक-एक कंप्यूटर कार्मिंक की तैनाती की व्यवस्था की जाए। खतौनी बकनाने का पूर्ण उत्तरदायित्व लेखपाल एवं जांच करने का दायित्व राजस्व निरीक्षक को दिया जाए। संघ के पूर्ण निर्णय के अनुसार रजिस्ट्रार कानूनगो भूलेख कंप्यूटरीकरण केंद्र में खतौनी बनाने का कार्य नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि कई मुख्य कार्य अस्थाई कर्मचारी कर रहे हैं, जिसमें गलती होने या हेराफेरी का अंदेशा बना रहता है, जबकि जांच में उन्हें फंसाया जाएगा।
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प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंद्र डबराल ने कहा कि मांगे न माने जाने पर उन्होंने खतौनी बनाने के काम का बहिष्कार किया हुआ है, अब शीघ्र ही अन्य कार्यों का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने फिलहाल हड़ताल करने से इंकार किया, लेकिन जरूरत पड़ी तो आगामी समय में हड़ताल करने को बाध्य होने की चेतावनी दी। इस मौके पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष अब्दुल हबीब खान, उपाध्यक्ष जसपाल सिंह राणा, सहमंत्री ललित मोहन पोखरियाल, संगठन मंत्री हरिहर उनियाल, युसूफ अली, नरेशचंद नौडियाल, हरीश चंद बुद्घिष्ट, हेमराज सिंह चौहान आदि शामिल हुए।
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तहसील तो नई बनीं, लेकिन पद सृजित नहीं
पत्रकार वार्ता करते हुए सहमंत्री ललित मोहन पोखरियाल ने बताया कि प्रदेश में नई तहसील भारी संख्या में अस्तित्व में आयी है, लेकिन रजिस्ट्रार कानूनगो की संख्या नहीं बढ़ सकी है। उन्होंने बताया कि चमोली में 12 तहसीलों में 15 पद है, जबकि इस समय कुल 7 कानूनगो है। पौड़ी में 10 तहसील, 12 पद, लेकिन 6 कार्यरत, अल्मोड़ा में 15 तहसील में 19 पदों के सापेक्ष में 6 कानूनगो कार्यरत है। ऐसे में इन तहसीलों में जनता के काम करना बड़ा मुश्किल हो रहा है और उनपर कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए शिकायत की जाती रही है।
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