श्रीनगर। विशेषज्ञ चिकित्सकों और संसाधनों की कमी से जूझ रहे राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) ने एनॉटमी (शरीर रचना विज्ञान) विभाग में पीजी की मान्यता दे दी है।
वर्ष 2008 में स्थापित श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय मेें सिर्फ एनॉटमी विभाग में पीजी कोर्स (एमएस) चल रहा है। वर्ष 2014 में निरीक्षण के बाद एमसीआई ने 4 सीट के लिए एलओपी (अनुमति पत्र) दी थी। एमसीआई की गाइडलाइन के अनुसार एलओपी के तीन साल बाद मान्यता लेनी पड़ती है। संस्थान को आगे कोर्स चलाने के लिए एप्रुवल मिल जाती है। नियमानुसार, मान्यता के लिए एमसीआई का निरीक्षण फाइनल ईयर की प्रयोगात्मक परीक्षा के दौरान होता है, जिसमें एमसीआई परीक्षा के तौर-तरीके परखती है। इसी के तहत विगत 16 व 17 जून को एमसीआई के आकलनकर्ता (एसेसर) ने एनॉटमी विभाग का निरीक्षण किया था। लंबी इंतजारी के बाद एमसीआई की पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन कमेटी ने एसेसर की रिपोर्ट के आधार पर 4 सीटों की मान्यता दे दी। संस्थान के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि मान्यता मिलने के बाद एमएस एनॉटमी की डिग्री मान्य हो गई है। अब 5 साल बाद मान्यता रिन्युअल होगा।