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अवध में क्या मुंह ले जाऊं, कहूं क्या पूछे जब राजा.....

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पीपलकोटी/नंदप्रयाग। ज्योति क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन में पांचवें दिन राजा दशरथ पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं और भाई भरत व शत्रुघन अपने भाई से बिछड़ने पर दुखी होते हैं। मंचन का शुभारंभ बंड विकास संगठन के अध्यक्ष शंभू प्रसाद भट्ट व बिहारी लाल बंडवाल ने किया।
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पीपलकोटी में चल रही रामलीला मंचन में श्रीराम, लक्ष्मण व सीता को वन में छोड़कर अयोध्या नगरी के मंत्री सुमंत अयोध्या लौट आते हैं। राजा दशरथ जब सुमंत के साथ श्रीराम को नहीं देखते हैं तो पुत्र वियोग में वे अपने प्राण त्याग देते हैं। वहीं, भरत जब अयोध्या लौट आते हैं तो अपने भाइयों के वन जाने पर विलाप करते हैं। संपूर्ण मंचन में भरत मिलाप को देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं। इस मौके पर नगर पालिका चमोली के पूर्व सीओ शांति प्रसाद भट्ट, आरएसएस के जिला प्रचारक बृजमोहन और प्रेम विश्नोई आदि मौजूद थे। वहीं, नंदप्रयाग में श्रीराम, लक्ष्मण व सीता के वनवास जाने का मंचन किया गया। श्रीराम व केवट के साथ संवाद को दर्शकों ने खूब सराहा। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सौरभ वैष्णव, वरिष्ठ अधिवक्ता समीर बहुगुणा, प्रह्लाद रौतेला, राजेंद्र रावत, बसंत कठैत, संजय रौतेला, कुलदीप रौतेला, नरेंद्र कठैत, विक्रम रौतेला और प्रदीप कठैत आदि मौजूद थे।
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